जॉर्डन घाटी में पानी की सप्लाई बंद, 47 फलस्तीनी परिवारों पर मंडराया बेघर होने का बड़ा खतरा.

फलस्तीनी परिवारों पर इन दिनों बहुत बड़ा संकट आ गया है और लोग पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी काफी परेशान हो रहे हैं। इसराइली मानवाधिकार संगठन B'Tselem की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी जॉर्डन घाटी में रहने वाले 47 फलस्तीनी परिवारों के सामने अपने घरों से बेघर होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इन प्रभावित परिवारों में कुल मिलाकर 300 से ज्यादा लोग रहते हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा छोटे बच्चे शामिल हैं। ये सभी लोग मुख्य रूप से Ras al-Ahmar, al-Tha'la और पूर्वी Atouf बस्तियों में अपनी जिंदगी बिता रहे हैं। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि यह संकट तब और ज्यादा गहरा गया जब इसराइली सैनिकों और सेटलर्स ने मिलकर पिछले हफ्ते इन इलाकों में पानी पहुंचाने वाली आखिरी बची पाइपलाइनों को पूरी तरह से काट दिया।
पानी की सप्लाई काटने की सोची-समझी साजिश
संगठन का यह साफ कहना है कि पानी के इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है ताकि लोग मजबूर होकर अपनी जमीन और घर छोड़कर चले जाएं। इसके साथ ही इसराइली प्रशासन उन गाड़ियों को भी रोक देता है जो इन बस्तियों में पीने का पानी भरने के लिए ले जाती हैं। इस पूरी घटना के बीच इलाके में 'Crimson Thread' नाम की एक नई दीवार बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है। यह कुल 22 किलोमीटर लंबी योजना है जो Ein Shibli से लेकर Tayasir मिलिट्री चेकपॉइंट तक बनाई जानी है। इस प्रोजेक्ट के तहत इस साल मार्च महीने से ही जमीन की खुदाई का काम शुरू हो गया था, जिसकी वजह से खेती की जमीनों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। किसानों के ग्रीनहाउस टूट गए हैं, सिंचाई की पाइपलाइनें बर्बाद हो गई हैं और फलदार पेड़ तथा फसलें उखाड़ दी गई हैं।
खेती की जमीनों और पेड़ों को पहुंचाया गया भारी नुकसान
इस साल जुलाई के महीने में इसराइली सेना ने कार्रवाई करते हुए 300 से ज्यादा जैतून और अंगूर के पेड़ों को पूरी तरह से हटा दिया था। इसके अलावा Atouf और al-Baqi'a के इलाकों में लगभग 45,000 डुनम कृषि भूमि पर बनी पानी की पाइपलाइनों को भी तोड़ दिया गया था, जिससे किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। द जेरूसलम पोस्ट में छपी रिपोर्ट के अनुसार इसराइली डिफेंस फोर्सेस यानी IDF के अधिकारियों ने इन सभी मामलों पर अपना पक्ष रखा है। सेना का कहना है कि वेस्ट बैंक के Area C में बने हुए कई घर गैरकानूनी तरीके से बनाए गए हैं और इस पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। उनका यह भी दावा है कि इन इलाकों में जो काम चल रहा है, वह असल में सुरक्षा के इंतजामों का हिस्सा है ताकि हथियारों की तस्करी को रोका जा सके और संभावित खतरों को समय रहते खत्म किया जा सके।
वेस्ट बैंक में लगातार बढ़ रही है लोगों के उजड़ने की रफ्तार
मानवाधिकार संगठन B'Tselem के आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो यह मामला किसी एक जगह का नहीं है बल्कि यह पूरे वेस्ट बैंक में चल रहे एक बड़े अभियान का हिस्सा है। संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर से लेकर इस साल 30 जून तक सेना की कार्रवाइयों और बस्तियों में रहने वाले लोगों की हिंसा के कारण कुल 64 फलस्तीनी बस्तियों को खाली करना पड़ा है। इस पूरी अवधि के दौरान कुल 4,328 लोग अपनी जगहों से विस्थापित हो चुके हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी बेहद दयनीय हो गई है। स्थानीय लोग इस भयानक गर्मी और पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते हुए अपने ही इलाकों में शरणार्थी जैसा जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर उन्हें किसी भी तरह की राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।