इस्लाम के आने से पहले मक्का में स्थित काबा की स्थिति आज से बिल्कुल अलग थी. उस समय अरब के लोगों में कई देवताओं को मानने का चलन था और काबा के अंदर और आसपास बहुत सारी मूर्तियां रखी होती थीं. इस्लामी परंपराओं के अनुसार यहां मूर्तियों की संख्या काफी ज्यादा थी और लोग अलग-अलग कबीलों के देवताओं की पूजा करते थे.

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काबा में कितनी मूर्तियां थीं और कौन से देवता प्रमुख थे?

इस्लामी परंपरा के अनुसार, इस्लाम से पहले काबा में लगभग 360 मूर्तियां रखी गई थीं. उस दौर में अरब में बहुदेववाद प्रचलित था, जिसका मतलब है कि लोग एक से ज्यादा देवताओं की पूजा करते थे. इन सभी मूर्तियों में Hubal नाम की मूर्ति को सबसे प्रमुख माना जाता था. अलग-अलग कबीलों के लोग अपने-अपने देवताओं की यहां पूजा करने आते थे.

मूर्तियों को कब और कैसे हटाया गया?

इन मूर्तियों को साल 630 ईस्वी यानी 8 हिजरी में हटाया गया. यह घटना तब हुई जब Prophet Muhammad ने मक्का विजय (Conquest of Mecca) हासिल की. मक्का जीतने के बाद उन्होंने काबा को शुद्ध करने का फैसला किया. उन्होंने काबा के अंदर रखी सभी मूर्तियों को हटाने और तोड़ने का आदेश दिया.

मूर्तियों के हटने के बाद क्या बदलाव आया?

काबा से सभी मूर्तियों को हटाने के बाद इसे पूरी तरह से एकेश्वरवाद के लिए समर्पित कर दिया गया. इसका सीधा मतलब यह है कि अब काबा केवल एक अल्लाह की इबादत के लिए इस्तेमाल होने लगा. इसके बाद से ही वहां केवल एक ईश्वर की पूजा का नियम लागू हुआ और बहुदेववाद का चलन खत्म हो गया.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.