मक्का की पवित्र मस्जिद में पवित्र काबा का गिलाफ (किस्वा) बदलने का काम पूरा हो गया है. यह काम नए इस्लामी साल 1448 हिजरी की शुरुआत के मौके पर किया गया. सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी SPAENG ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ तीन घंटे में पूरी कर ली गई.

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यह काम 16 जून 2026 को किया गया, जो कि 1 मुहर्रम 1448 हिजरी का दिन था. यह एक बहुत ही सावधानी से किया जाने वाला काम है जिसे खास तौर पर प्रशिक्षित टीमों द्वारा अंजाम दिया गया. इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत असर की नमाज़ के बाद हुई, जिसमें सबसे पहले काबा के दरवाज़े से सोने के पर्दे, झूमर और सजावटी सामानों को हटाया गया.

नए गिलाफ को लगाने का काम आधी रात के आसपास शुरू हुआ और इसे फज्र की नमाज़ से पहले पूरा कर लिया गया. टीम ने काबा की चारों दीवारों पर एक-एक करके नया गिलाफ चढ़ाया और पुराने गिलाफ को नीचे उतारा. सबसे आखिर में सोने की कढ़ाई वाली पट्टी, जिसे हिजाम कहा जाता है, उसे सिलाई के जरिए लगाया गया. इसके बाद दरवाज़े का पर्दा लगाया गया, जिसकी चौड़ाई करीब 3.33 मीटर और लंबाई 6.35 मीटर है.

यह नया गिलाफ शुद्ध काले रेशम से तैयार किया गया है और इसका कुल वजन लगभग 1,415 किलो है. इस पर सोने और चांदी के तारों से 68 कुरानी आयतें लिखी गई हैं. इस गिलाफ को बनाने में करीब 11 महीने का समय लगा और इसे सात अलग-अलग चरणों से गुज़ारा गया, जिसमें पानी की सफाई, धुलाई, बुनाई, छपाई, कढ़ाई, असेंबली और आखिरी जांच शामिल थी.

यह पूरा काम जनरल प्रेसिडेंसी फॉर द अफेयर्स ऑफ द ग्रैंड मॉस्क एंड द प्रॉफेट्स मॉस्क की देखरेख में हुआ, जिसके अध्यक्ष शेख डॉ अब्दुल रहमान बिन अब्दुलअजीज अल-सुदैस हैं. गिलाफ को बनाने की जिम्मेदारी किंग अब्दुलअजीज कॉम्प्लेक्स फॉर द होली काबा किस्वा की थी, जहाँ करीब 150 से 154 सऊदी कारीगर और विशेषज्ञ काम करते हैं.

पुराने गिलाफ को हटाने के बाद उसे सहेज कर रखा जाता है. बाद में इसके कुछ हिस्सों को दुनिया भर के मुस्लिम नेताओं, अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों और संग्रहालयों को तोहफे के रूप में दिया जाता है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.