नया हिजरी साल शुरू होने वाला है और इसी मौके पर पवित्र काबा को नए गिलाफ (किस्वा) से सजाया जाएगा। यह परंपरा हर साल निभाई जाती है और इसके लिए सऊदी अरब में काफी समय पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस बार भी पूरी सावधानी और बारीकी के साथ काम किया जा रहा है ताकि सब कुछ समय पर पूरा हो सके।

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किस्वा बनाने की प्रक्रिया

किस्वा बनाने का काम King Abdulaziz Complex for the Holy Kaaba Kiswa में शुरू होता है। इसे बनाने के लिए शुद्ध प्राकृतिक रेशम (silk) का इस्तेमाल किया जाता है और इस पर सोने व चांदी के धागों से बेहद बारीकी से कढ़ाई की जाती है।

जब गिलाफ बदलने की तारीख पास आती है, तो Grand Mosque के अंदर तैयारियां तेज कर दी जाती हैं। नए किस्वा के हिस्सों को तय जगहों पर पहुंचा दिया जाता है। एक्सपर्ट्स इसकी कढ़ाई और कुरान की आयतों की आखिरी बार जांच करते हैं ताकि इंस्टॉलेशन के समय कोई कमी न रहे।

कैसे होता है गिलाफ का बदलाव

इस पूरे ऑपरेशन को पूरा करने के लिए विशेष तकनीकी और इंजीनियरिंग टीमों को लगाया जाता है। यह प्रक्रिया एक तय क्रम में पूरी की जाती है:

  • सबसे पहले पुराने किस्वा से सोने के हिस्सों और कढ़ाई वाले टुकड़ों को हटाया जाता है।
  • इसके बाद पुराने गिलाफ के हिस्सों को सावधानी से अलग किया जाता है।
  • फिर नए किस्वा को काबा की चारों दिशाओं में एक-एक कर लगाया जाता है।
  • इसी रात काबा के चारों तरफ बांधने वाली कढ़ाई वाली बेल्ट और दरवाजे के पर्दे को भी बदला जाता है।

मुहर्रम की पहली तारीख को सुबह होने तक काबा नए गिलाफ में नजर आएगा। सऊदी अरब ने इस काम में दुनिया का बेहतरीन अनुभव हासिल किया है, जहां पुरानी विरासत के साथ लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया सऊदी अरब के नेतृत्व की पवित्र मस्जिदों के प्रति सेवा और समर्पण को बताती है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.