Kerala: शादी के जोड़े में डॉक्टर दुल्हन, मंडप छोड़कर बचाने लगी दो लोगों की जान

केरल के कन्नूर जिले से एक बहुत ही हैरान करने वाली और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। यहाँ अगस्त 2026 के आखिरी हफ्ते में शादी की खुशियों के बीच एक ऐसा पल आया जिसने सबको हैरान कर दिया। शादी के जोड़े में सजी एक दुल्हन ने अपना मंडप और रस्में छोड़कर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद दी। यह घटना तब हुई जब वेन्यू पर काम करने वाले दो कैटरिंग वर्कर्स की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इस घटना ने साबित कर दिया कि डॉक्टर का फर्ज सबसे पहले आता है, चाहे फिर वो उनका अपना शादी का दिन ही क्यों न हो।
डॉक्टर शिरिन सुबैर ने निभाया फर्ज
इस दुल्हन का नाम Dr. Shirin Subair है, जो वल्लुवनद अस्पताल ओट्टापालम में इमरजेंसी मेडिसिन में फर्स्ट-इयर एमडी की छात्रा हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी के फंक्शन के दौरान दो कैटरिंग वर्कर्स अचानक अस्वस्थ महसूस करने लगे। बिना एक पल गंवाए, शादी के भारी-भरकम लिबास और गहनों में सजी डॉक्टर शिरिन ने तुरंत अपनी मेडिकल ट्रेनिंग का इस्तेमाल किया। उन्होंने पहले वर्कर का नाक से खून बहने की समस्या यानी नोजब्लीड का इलाज किया और दूसरे वर्कर को चक्कर आने पर संभाला। मीडिया रिपोर्ट्स और पीटीआई की खबर के अनुसार, यह मामला पूरी तरह सच है और हर कोई इस दुल्हन की तारीफ कर रहा है।
कन्नूर के पानूर की रहने वाली और Dr. Rijaz के साथ परिणय सूत्र में बंधने वाली डॉक्टर शिरिन ने बाद में बताया कि उन्होंने इस स्थिति में वैसे ही रिएक्ट किया जैसे वे किसी भी अन्य परिस्थिति में करतीं। उनका कहना था कि उन्होंने इसमें कुछ भी असाधारण नहीं किया और हर आम आदमी को बुनियादी फर्स्ट-एड यानी प्राथमिक उपचार की जानकारी होनी चाहिए ताकि वक्त पर किसी की जान बचाई जा सके।
केरल में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कड़े नियम
यह पूरी घटना ऐसे समय में सामने आई है जब केरल सरकार स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं को लेकर पहले से ही बहुत सख्त नियम लागू कर चुकी है। राज्य में मई 2023 में हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए हॉस्पिटल प्रोटेक्शन एक्ट को और मजबूत किया गया था। इसके अलावा, केरल स्वास्थ्य विभाग ने मार्च 2024 में इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने के लिए 'Code Grey' प्रोटोकॉल शुरू किया था। साथ ही, नवंबर 2025 में केरल हाईकोर्ट ने यह कड़ा आदेश दिया था कि कोई भी अस्पताल एडवांस पैसे न मिलने की वजह से किसी भी मरीज को इमरजेंसी इलाज देने से मना नहीं कर सकता है। इसके अलावा मार्च 2026 तक सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी विभागों के लिए शिफ्ट आधारित सिस्टम और ओपीडी के समय को बढ़ाया गया है ताकि इलाज में कोई देरी न हो।