किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला 27 अप्रैल 2026 को अमेरिका पहुंचे हैं। यह दौरा चार दिनों का है और इसका मुख्य मकसद ब्रिटेन और अमेरिका के बीच बिगड़े रिश्तों को सुधारना है। दरअसल, ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों के लिए ब्रिटिश बेस इस्तेमाल करने से ब्रिटेन ने मना कर दिया था, जिससे अमेरिका काफी नाराज था।

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अमेरिका और ब्रिटेन के बीच विवाद की असली वजह क्या है?

अमेरिका चाहता था कि वह ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमले करने के लिए ब्रिटेन के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करे। लेकिन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए मना कर दिया। स्टारमर ने साफ शब्दों में कहा कि यह हमारी जंग नहीं है और हमें इसमें नहीं घसीटा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने 1 मार्च 2026 को केवल रक्षात्मक (defensive) हमलों की इजाजत दी थी। इस फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कड़ी नाराजगी जताई और स्टारमर की तुलना नेविल चेम्बरलेन से कर दी।

किंग चार्ल्स के इस दौरे में क्या-क्या होगा?

यह राजकीय दौरा 27 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस दौरान किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला व्हाइट हाउस जाएंगे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के साथ चाय पिएंगे। इसके अलावा वे व्हाइट हाउस के बीहाइव का दौरा भी करेंगे। किंग चार्ल्स अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित भी करेंगे। बकिंघम पैलेस के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के साझा इतिहास, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को फिर से मजबूत करना है।

वाशिंगटन में सुरक्षा की क्या स्थिति है?

25 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन डीसी में एक गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर काफी चिंता जताई गई थी। लेकिन बकिंघम पैलेस ने साफ किया कि यह दौरा अपनी तय योजना के मुताबिक ही पूरा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा प्रतीकात्मक है और इसका उद्देश्य ईरान विवाद के कारण पैदा हुए तनाव को कम करना है।