Yemen: अल-महरा के मछुआरों के लिए फरिश्ता बना KSrelief, तूफान और बाढ़ में डूबी नावों की जगह मिली नई मदद.

Aanya5 August 20262 min read43 viewsYemen
Yemen: अल-महरा के मछुआरों के लिए फरिश्ता बना KSrelief, तूफान और बाढ़ में डूबी नावों की जगह मिली नई मदद.

यमन के तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पिछले कुछ समय में आए चक्रवातों और भयानक बाढ़ के कारण अल-महरा गवर्नरेट में सैकड़ों मछुआरों ने अपनी जीविका का जरिया यानी अपनी नावें खो दी थीं। ऐसे में King Salman Humanitarian Aid and Relief Center (KSrelief) ने आगे बढ़कर इन लोगों की मदद का बीड़ा उठाया है। यह संस्था न केवल नावों का वितरण कर रही है, बल्कि मछली पकड़ने के काम को फिर से आधुनिक और सुरक्षित बनाने में भी जुटी है।

मछुआरों को फिर से काम पर लौटने में मिली मदद

इस राहत अभियान के तहत 9 जून 2026 को हुस्वैन जिले के मछुआरों को 50 नई फिशिंग बोट्स सौंपी गईं, जो आधुनिक इंजनों से लैस हैं। यह पहल 'Sustainable Agriculture and Fisheries Empowerment Project' का हिस्सा है। इस बड़े प्रोजेक्ट का लक्ष्य हद्रमउत, अल-महरा और सोकोत्रा गवर्नरेट के 150 मछुआरों को कुल 90 नई बोट और 150 सेफ्टी किट उपलब्ध कराना है।

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हुस्वैन जिले के डायरेक्टर जनरल Yasser Al-Assad ने इस सहायता की जमकर तारीफ की है। उन्होंने बताया कि यह मदद न केवल मछुआरों को फिर से काम शुरू करने में सक्षम बना रही है, बल्कि इससे स्थानीय बाजारों में ताजी मछली की उपलब्धता भी बढ़ेगी। यह पूरी जानकारी Saudi Press Agency (SPA) की आधिकारिक रिपोर्ट से प्राप्त हुई है।

बुनियादी ढांचे में सुधार और नई सुविधाएं

केवल नाव ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कई बड़े कदम उठाए गए हैं। 4 जुलाई को KSrelief और United Nations Food and Agriculture Organization (FAO) ने मिलकर अल-हसीन जिले में एक नए Fish Landing Center का उद्घाटन किया है। इसका उद्देश्य यमन के मानवीय संकट से प्रभावित लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।

इसके साथ ही, 17 मई को अल-घैदा जिले में मछली और सब्जी मंडियों के पुनर्वास के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए। FAO के साथ मिलकर चलाए जा रहे इन प्रोजेक्ट्स के जरिए 3,000 मछुआरों को जरूरी सामान जैसे कि आइसबॉक्स और लाइफ जैकेट बांटे गए हैं। यह सभी प्रयास इस दिशा में किए जा रहे हैं ताकि आपदाओं के बावजूद स्थानीय लोग अपना गुजारा गरिमा के साथ कर सकें और मछली पालन का उद्योग एक बार फिर से फल-फूल सके।

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