कुवैत में नशीले पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग के खिलाफ चल रहे कड़े अभियान के तहत एक बड़ा फैसला सामने आया है। कुवैत सिटी की क्रिमिनल कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी के गंभीर आरोपों में दो भारतीय प्रवासियों को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है। यह फैसला न केवल आरोपियों के लिए बल्कि खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों के लिए भी एक सख्त चेतावनी है कि नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में यहाँ की न्याय प्रणाली ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है।

जज खालिद अल‑तहूस की अध्यक्षता में कोर्ट ने माना अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा, देश में जहर फैलाने की थी साजिश

कुवैत सिटी की क्रिमिनल कोर्ट में जज खालिद अल‑तहूस (Khaled Al‑Tahous) की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने पाया कि पकड़े गए दोनों भारतीय नागरिक एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का हिस्सा थे। जाँच में यह साबित हुआ कि इन आरोपियों ने कुवैत की सीमाओं के बाहर से नशीले पदार्थ मँगवाए और उन्हें देश के भीतर बेचने और वितरित करने की पूरी तैयारी कर ली थी। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने इसे देश की सुरक्षा और समाज के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए दोषियों को अधिकतम सजा यानी मौत की सजा सुनाने का फैसला किया।

कैफान और शुवेख जैसे रिहायशी इलाकों में छापेमारी के दौरान मिला 22 किलो नशीला पदार्थ, सप्लाई से पहले ही दबोचे गए आरोपी

इन दोनों भारतीयों की गिरफ्तारी एक सुनियोजित खुफिया ऑपरेशन का हिस्सा थी। कुवैत के गृह मंत्रालय (Ministry of Interior) के तहत आने वाले ड्रग कंट्रोल जनरल डिपार्टमेंट को सूचना मिली थी कि कुछ विदेशी नागरिक नशीले पदार्थों की बड़ी खेप के साथ सक्रिय हैं। इस सूचना के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने कैफान (Kaifan) और शुवेख (Shuwaikh) जैसे रिहायशी इलाकों में अचानक छापेमारी की। इस दौरान आरोपियों के पास से करीब 14 किलो हेरोइन और 8 किलो मेथामफेटामिन (जिसे स्थानीय भाषा में ‘शबू’ कहा जाता है) बरामद की गई। अधिकारियों के मुताबिक, इस ड्रग्स को स्थानीय बाजार में सप्लाई करने की योजना थी, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया।

फॉरेंसिक रिपोर्ट और केस फाइल ने साबित किया जुर्म, कोर्ट ने कहा— समाज को सुरक्षित रखने के लिए कड़े फैसले जरूरी

अदालत में सुनवाई के दौरान फॉरेंसिक रिपोर्ट और केस फाइल ने आरोपियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि दोनों आरोपी न केवल ड्रग्स रखने के दोषी थे, बल्कि वे इसकी तस्करी और वितरण की साजिश में भी सीधे तौर पर शामिल थे। कुवैत के एंटी-नारकोटिक्स लॉ (Anti‑Narcotics Law) के तहत इसे एक बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि समाज को नशा मुक्त रखने और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए ‘सख्त संदेश’ देना अनिवार्य है, इसीलिए कानून के तहत उपलब्ध सबसे कड़ी सजा का चयन किया गया।

फांसी की सजा पर अभी भी कानूनी रास्ते खुले, अपील कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बाद ही अंतिम होगा फैसला

कुवैत की न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार, क्रिमिनल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा अंतिम नहीं होती है। यह मामला अब स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट ऑफ अपील (Court of Appeal) और उसके बाद कोर्ट ऑफ कैसेशन (सुप्रीम कोर्ट) के पास जाएगा। जब तक देश की ये दोनों ऊपरी अदालतें निचली अदालत के फैसले को बरकरार नहीं रखतीं, तब तक सजा लागू नहीं की जा सकती। कानूनी प्रक्रिया के अंतिम चरण में देश के अमीर (Emir) द्वारा डेथ वारंट पर हस्ताक्षर या दया याचिका (Clemency) का विकल्प भी होता है। ऐसे मामलों में आमतौर पर भारतीय दूतावास अपने नागरिकों को कानूनी सहायता प्रदान करने और दया याचिका दायर करने में मदद करता है।

खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के लिए गंभीर चेतावनी, अनजान पार्सल या लालच के चक्कर में जा सकती है जान

यह घटना कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए एक बड़ी चेतावनी है। कुवैत के कानूनों के मुताबिक, ड्रग्स की तस्करी, सप्लाई या बड़ी मात्रा में इसे रखने पर मौत की सजा, उम्रकैद, भारी जुर्माना और संपत्ति ज़ब्ती जैसे कड़े प्रावधान हैं। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कुवैत में पहले से ही कुछ भारतीय नागरिक मौत की सजा (Death Row) का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार लोग पैसों के लालच में या अनजाने में ‘कैरियर’ (Carrier) बन जाते हैं और दूसरों का सामान या पार्सल ले जाने के लिए तैयार हो जाते हैं, जो अंततः उनकी जान के लिए खतरा बन जाता है।

GulfHindi Desk

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