कुवैत में 1 जून 2026 को अचानक अफरातफरी मच गई जब ईरान की तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इसके तुरंत बाद कुवैत ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को चालू कर दिया और हवा में ही इन हमलों को रोक दिया। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इसे एक बेहद खतरनाक हमला बताया है। वहीं ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि उन्होंने कुवैत में मौजूद अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया था।

कुवैत ने क्यों एक्टिव किया अपना एयर डिफेंस सिस्टम?

कुवैत की सेना ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन के हमलों का डटकर मुकाबला किया। कुवैत के आसमान में धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई थी। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। कुवैत ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है और कहा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। कुवैत सरकार ने इस पूरी घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है।

ईरान और अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा तनाव?

ईरान के मुताबिक, यह हमला अमेरिका की उन कार्रवाइयों का बदला था जो उसने पिछले दिनों ईरान के सिरीक द्वीप और बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास की थीं। अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी माना है कि उन्होंने पिछले सप्ताहांत ईरान के रडार और ड्रोन कंट्रोल सेंटरों पर हमले किए थे। अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान ने उनके एक ड्रोन को मार गिराया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई थी। राहत की बात यह रही कि कुवैत में हुए इस मिसाइल हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा क्योंकि मिसाइल को हवा में ही मार गिराया गया था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कुवैत पर यह हमला कब हुआ और क्या इसमें कोई नुकसान हुआ है?

यह हमला 1 जून 2026 को हुआ था। कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया, जिससे अमेरिकी एयर बेस पर कोई नुकसान नहीं हुआ।

ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी बेस को निशाना क्यों बनाया?

ईरान के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के सिरीक द्वीप और बंदर अब्बास में हवाई हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर जवाबी हमला किया।