14 जुलाई 2026 को कुवैत की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा खतरा मंडराया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल सऊद अल-अतवान ने जानकारी दी कि कुवैत की एयर डिफेंस फोर्स ने ईरान की तरफ से आए घातक हथियारों के जखीरे को हवा में ही नाकाम कर दिया। इस हमले में 1 बैलिस्टिक मिसाइल, 5 क्रूज मिसाइल और 33 हथियारबंद ड्रोन शामिल थे। कुवैत सिटी के आसमान में इनके फटने की आवाजें सुनी गईं।
कुवैत नौसेना का जहाज बना निशाना
इस हमले के दौरान कुवैत की नौसेना का एक जहाज भी निशाना बना, जिसमें 4 सैनिक घायल हो गए। फिलहाल सभी घायल जवानों का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। कुवैत ने साफ कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और देश की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
ईरान का दावा और अमेरिका की प्रतिक्रिया
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उन्होंने कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस को निशाना बनाया है। साथ ही, ईरान की सेना ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर भी हमले का दावा किया है, जिसमें संचार प्रणाली, ईंधन डिपो और पेट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि ईरान ने पहले हमला किया है, जिसे वह बड़ी गलती मानते हैं और अमेरिका इसका जवाब देने के लिए आगे की कार्रवाई कर रहा है। कुवैत के सैन्य मुख्यालय ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।
