कुवैत और बहरीन में उस समय हड़कंप मच गया जब 11 जून 2026 को कुवैत के आसमान में उड़ते हुए दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन दिखाई दिए। कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने तुरंत एक्शन लेते हुए इन हवाई खतरों को हवा में ही रोक दिया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

कुवैत सेना और सरकार का इस हमले पर क्या है कहना?

कुवैत सेना के जनरल स्टाफ ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि 11 जून 2026 को उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने तय नियमों के तहत दुश्मन के हवाई हमलों का सामना किया और उन्हें सफलतापूर्वक मार गिराया। इससे ठीक एक दिन पहले यानी 10 जून को भी ऐसी ही हरकत देखी गई थी। कुवैत के विदेश मंत्रालय और कैबिनेट ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।

सरकार ने इसे कुवैत की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताया है। सरकार ने साफ किया है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता उनके लिए एक लाल रेखा की तरह है और वे अपनी रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार रखते हैं। कुवैती प्रशासन ने आम जनता और वहां रहने वाले प्रवासियों से अपील की है कि वे सुरक्षा से जुड़े सरकारी निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें।

ईरान ने क्यों किया हमला और कहां-कहां दागे मिसाइल?

ईरान की सेना (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने कुवैत में मौजूद अली अल सलेम (Ali Al Salem) और अहमद अल जाबेर (Ahmad Al Jaber) अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इसके साथ ही बहरीन में शेख ईसा बेस और अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) को भी निशाना बनाने की बात कही गई है।

ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए पिछले हमलों का सीधा बदला है। इस हमले के दौरान बहरीन में भी खतरे के सायरन बजाए गए और नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। इस अचानक बढ़े तनाव के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों, विशेषकर भारतीय प्रवासियों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता देखी जा रही है, क्योंकि इन देशों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक काम करते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कुवैत में हवाई हमला कब और किसने किया?

यह हमला 11 जून 2026 को हुआ। ईरान की सेना (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करने का दावा किया, जिसे कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया।

इस हमले को लेकर कुवैत सरकार का क्या रुख है?

कुवैत के विदेश मंत्रालय और कैबिनेट ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और कहा है कि देश की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है और वे रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएंगे।