कुवैत की अदालत ने एक बेदून (बिना नागरिकता वाले) व्यक्ति को सरकारी एजेंसी का अपमान करने और अफवाहें फैलाने के आरोप में 3 साल की जेल की सजा सुनाई है. यह मामला सेंट्रल एजेंसी फॉर रिमिडीइंग द स्टेटस ऑफ इलीगल रेजिडेंट्स (CARIRS) के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने से जुड़ा है. अपील कोर्ट ने हाल ही में इस सजा को बरकरार रखा है.

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कोर्ट ने क्या सजा सुनाई और क्या थे आरोप?

अदालत ने पाया कि आरोपी व्यक्ति ने शिक्षा के अधिकारों को लेकर गलत दावे किए और समाज में अफवाहें फैलाईं. अधिकारियों के मुताबिक, इसका मकसद जनता को गुमराह करना और देश की छवि खराब करना था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी खबर को सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलाने से पहले उसकी पूरी जांच करना जरूरी होता है, लेकिन आरोपी ने बिना किसी सबूत के दावे किए.

मामले की पूरी टाइमलाइन और अन्य अपडेट्स

  • 2 अप्रैल 2026: अपील कोर्ट ने 3 साल की जेल की सजा को सही ठहराया.
  • सितंबर 2023: बेदून एक्टिविस्ट मोहम्मद अल-बरगाश को स्टेट सिक्योरिटी ने गिरफ्तार किया था.
  • जनवरी 2024: कोर्ट ऑफ अपील ने उन्हें कठोर श्रम के साथ 3 साल की जेल की सजा सुनाई थी.

इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी आई है. एमनेस्टी इंटरनेशनल की डिप्टी रीजनल डायरेक्टर आया मज्ज़ूब ने इस कार्रवाई को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से लोगों के मन में डर पैदा होता है और बेदून समुदाय के खिलाफ होने वाले भेदभाव को खत्म किया जाना चाहिए. हालांकि, अदालत ने आरोपी के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए रहम की याचिका को खारिज कर दिया.

Frequently Asked Questions (FAQs)

बेदून व्यक्ति को जेल क्यों हुई?

उन्हें सेंट्रल एजेंसी फॉर रिमिडीइंग द स्टेटस ऑफ इलीगल रेजिडेंट्स का अपमान करने और शिक्षा अधिकारों के बारे में गलत अफवाहें फैलाने के कारण 3 साल की जेल हुई है.

अपील कोर्ट ने यह फैसला कब सुनाया?

अपील कोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को इस सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.