कुवैत सरकार ने सरकारी कामकाज और सुरक्षा को लेकर दो बड़े फैसले लिए हैं. अब किसी भी सरकारी मंत्रालय या एजेंसी को कंसल्टिंग फर्मों के साथ कॉन्ट्रैक्ट करने से पहले कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी. इसके साथ ही, कुवैत ने ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है.

सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए नया नियम

प्रधानमंत्री Sheikh Ahmad Abdullah Al-Ahmad Al-Sabah ने एक नया निर्देश जारी किया है. इसके तहत अब सभी मंत्रियों को कंसल्टिंग फर्मों के साथ किसी भी समझौते से पहले कैबिनेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा. यह निर्देश 30 जून 2026 के आसपास जारी किया गया था, जिसकी जानकारी 1 और 2 जुलाई को दी गई. सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि सरकारी खर्चों, खरीदारी और कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया पर बेहतर निगरानी रखी जा सके.

ईरान के हमलों पर कुवैत का कड़ा रुख

कुवैत कैबिनेट और विदेश मंत्रालय ने ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन बताया है. 28 जून 2026 के आसपास ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमले किए थे. इन हमलों में कुवैत के बिजली घरों, पानी के प्लांट और Kuwait International Airport के रडार सिस्टम को भारी नुकसान पहुँचा है. वहीं बहरीन में नागरिक संपत्तियों को नुकसान हुआ है.

कुवैत सरकार ने साफ किया है कि वह अपनी सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है. कैबिनेट ने देश की सेना को हाई अलर्ट (maximum operational readiness) पर रखा है और कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई हमलों को हवा में ही रोक दिया है.

कुवैत ने बहरीन के साथ अपनी एकजुटता जताई है और कहा है कि बहरीन की सुरक्षा पूरे GCC देशों की सामूहिक सुरक्षा का हिस्सा है. कुवैत का मानना है कि इस तरह के हमलों से इलाके में तनाव बढ़ता है और शांति की कोशिशों को नुकसान पहुँचता है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.