कुवैत ने मिडिल ईस्ट में शांति लाने के लिए एक बड़ी पहल की है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में कुवैत के राजदूत ने अमेरिका और ईरान से लगातार बातचीत करने की अपील की है। कुवैत चाहता है कि पूरे क्षेत्र में शांति बनी रहे ताकि आम लोग और व्यापार बिना किसी डर के चल सकें।
15 जून 2026 को कुवैत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MoU) का स्वागत किया। कुवैत सरकार का मानना है कि यह कदम तनाव को कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए बहुत जरूरी है। मंत्रालय ने इस कोशिश में पाकिस्तान और कतर जैसे देशों की मदद की भी तारीफ की है।
हालांकि, इस शांति प्रक्रिया में कुछ रुकावटें भी आईं। 14 जून को ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागर गालिबाफ ने कहा था कि अमेरिका के साथ शांति वार्ता का अब कोई मतलब नहीं रह गया है। उन्होंने यह बात बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में इजरायली हमलों के बाद कही और अमेरिका पर अपनी जिम्मेदारियां पूरी न करने का आरोप लगाया।
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया था कि मिडिल ईस्ट में युद्ध खत्म करने का समझौता 14 जून तक साइन हो सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोला जा सकता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उम्मीद जताई थी कि यह डील अगले 24 घंटों में फाइनल हो जाएगी।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 12 जून को बताया था कि अमेरिका के साथ जंग खत्म करने का समझौता अब बहुत करीब है। इस प्रस्तावित MoU में युद्ध खत्म करने, इजरायल की वापसी और ईरान की जमी हुई संपत्ति को छोड़ने जैसी बातें शामिल थीं। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और कुछ खास ग्रुप्स को मिलने वाली मदद पर रोक नहीं लगाता, तब तक कोई पैसा नहीं छोड़ा जाएगा।