कुवैत के सेंट्रल बैंक (CBK) ने क्षेत्रीय तनाव और युद्ध के दबाव को देखते हुए स्थानीय बैंकों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। बैंक ने साफ कहा है कि जो कंपनियां या कारोबारी मौजूदा हालातों की वजह से आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं, उनके प्रति नरम रुख अपनाया जाए। इस फैसले के तहत प्रभावित कारोबारियों को उनके कर्ज की किस्तों को टालने और क्रेडिट राहत देने की सुविधा दी जाएगी ताकि उनका काम चलता रहे और देश की अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर न पड़े।

किन कारोबारियों को मिलेगा इस सरकारी राहत का फायदा?

सेंट्रल बैंक द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, यह सुविधा उन सभी व्यवसायों के लिए है जो यह साबित कर सकते हैं कि उनका कामकाज युद्ध और क्षेत्रीय तनाव की वजह से प्रभावित हुआ है। इसके लिए कुछ जरूरी नियम तय किए गए हैं:

  • कर्ज लेने वाले ग्राहकों को बैंक को यह दिखाना होगा कि उनका काम वास्तव में प्रभावित हुआ है।
  • बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावित ग्राहकों के लिए लोन की किस्तों (Installments) को आगे बढ़ाने के विकल्प दें।
  • यह राहत उन कर्जों पर लागू नहीं होगी जिन पर पहले से कानूनी कार्रवाई चल रही है या जो पहले ही पूरी तरह बकाया हो चुके हैं।
  • किस्तों को टालने की अवधि को कर्ज चुकाने की कुल अधिकतम समय सीमा में शामिल नहीं किया जाएगा।
  • बैंकों को ग्राहकों की सहमति से इन बदलावों का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और इसे Kuwait Credit Information Network Company (Ci-Net) पर अपडेट करना होगा।

सेंट्रल बैंक द्वारा नियमों में किए गए मुख्य बदलाव

सेंट्रल बैंक ने बैंकों को ज्यादा पैसा बाजार में लगाने की अनुमति देने के लिए कई तकनीकी नियमों में ढील दी है। इन बदलावों से बैंकों के पास नकदी की कमी नहीं होगी और वे कारोबारियों की मदद आसानी से कर सकेंगे। मुख्य बदलाव नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं:

नियम का नाम पुराना स्तर नया स्तर
Liquidity Coverage Ratio (LCR) 100 प्रतिशत 80 प्रतिशत
Net Stable Funding Ratio (NSFR) 100 प्रतिशत 80 प्रतिशत
Regulatory Liquidity Ratio (RLR) 18 प्रतिशत 15 प्रतिशत
Maximum Lending Limit (कर्ज सीमा) 90 प्रतिशत 100 प्रतिशत
Capital Adequacy (पूंजी पर्याप्तता) 13 प्रतिशत 12 प्रतिशत

सेंट्रल बैंक ने भरोसा दिलाया है कि कुवैत का बैंकिंग सेक्टर पूरी तरह से मजबूत है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। जानकारों का कहना है कि यह कदम पहले से की गई तैयारी का हिस्सा है ताकि भविष्य में किसी भी बड़े आर्थिक संकट से बचा जा सके। बैंकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे इन राहतों की जानकारी 30 जून तक अपने वित्तीय विवरणों में शामिल करें।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.