कुवैत में नागरिकता को लेकर एक बहुत पुराना मामला फिर से सामने आया है। इसमें दो इराकी भाइयों को फर्जी तरीके से एक कुवैती नागरिक का बेटा बना दिया गया था। अधिकारियों ने जब पुरानी फाइलों की जांच की तो इस बड़े धोखे का पता चला। अब नए DNA टेस्ट के बाद पूरी सच्चाई सामने आ गई है।
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नागरिकता फर्जीवाड़े का पूरा मामला क्या है?
यह मामला साल 1994 का है। उस समय एक कुवैती नागरिक ने खुद Nationality Department में जाकर कबूल किया था कि उसके रिकॉर्ड में दर्ज दो लोग उसके बेटे नहीं हैं। असल में वे उसकी पत्नी के भाई थे और उनका संबंध इराक से था। जांच के दौरान उसकी पत्नी ने भी माना कि उसके पिता ने ही अपने भाइयों की नागरिकता ठीक करवाने के लिए यह सब करने को कहा था।
DNA टेस्ट ने क्या खुलासा किया?
सच्चाई जानने के लिए अधिकारियों ने DNA टेस्ट करवाया। इसमें उन दो पुरुषों का DNA उस कुवैती नागरिक के पांच अन्य असली बेटों के साथ मिलाया गया। जांच में यह साफ हो गया कि उन दो लोगों का उस नागरिक से कोई जैविक रिश्ता नहीं था। इस रिपोर्ट ने यह बात पक्की कर दी कि नागरिकता के लिए फर्जी कागजात का इस्तेमाल हुआ था।
इस मामले की मौजूदा स्थिति क्या है?
इस मामले की फाइल 1994 में ही खुल गई थी, लेकिन उस समय कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी। अब सक्षम अधिकारियों ने इस पुरानी फाइल की दोबारा समीक्षा की है। जिस कुवैती नागरिक और उसकी पत्नी ने यह फर्जीवाड़ा किया था, उन दोनों की अब मृत्यु हो चुकी है। हालांकि, इस मामले की पूरी जानकारी अब दोबारा सार्वजनिक हुई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह नागरिकता फर्जीवाड़ा कब हुआ था?
यह फर्जीवाड़ा दशकों पुराना है। इसकी पहली रिपोर्ट और कुवैती नागरिक का कबूलनामा साल 1994 में दर्ज किया गया था।
DNA टेस्ट से क्या साबित हुआ?
DNA टेस्ट से यह पता चला कि जिन दो इराकी भाइयों को कुवैती नागरिक का बेटा बताया गया था, उनका उस व्यक्ति से कोई जैविक संबंध नहीं था।