कुवैत सरकार अपनी नागरिकता प्रणाली को साफ़-सुथरा बनाने के लिए काफी सख्त हो गई है। देश की सुप्रीम कमेटी अब लगभग 530 ऐसे मामलों की जांच कर रही है जिनमें नागरिकता पाने के लिए धोखाधड़ी और फर्जी कागजात का इस्तेमाल किया गया था। यह कदम देश की कानूनी अखंडता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

ℹ: Bahrain Siren Alert: बहरीन में बजे सायरन, ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच अलर्ट, कुवैत और कतर में भी हलचल

इस कमेटी की कमान प्रथम उप प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री Sheikh Fahd Al-Yousef संभाल रहे हैं। 9 जुलाई 2026 को इन मामलों की समीक्षा की जानकारी दी गई। सरकार ने जांच के लिए बहुत आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया है। इसमें DNA टेस्ट, पुराने रिकॉर्ड, इंटरपोल (Interpol) की मदद और सीधे इंटरव्यू शामिल हैं।

जांच के दौरान उन लोगों से सीधे सवाल-जवाब किए जा रहे हैं ताकि धोखाधड़ी के तरीके और मकसद का पता चल सके। पिता का DNA टेस्ट भी किया जा रहा है ताकि कानूनी अधिकारों और पारिवारिक संबंधों को सही से जांचा जा सके। इनमें करीब 40 मामले उन बच्चों के हैं जिनके पिता कुवैती हैं लेकिन माता विदेशी थीं और उन्होंने अब तक नागरिकता के दस्तावेज, पासपोर्ट या बायोमेट्रिक रिकॉर्ड नहीं लिए थे।

सरकार ने साफ कर दिया है कि केवल वही लोग कुवैत की नागरिकता रख पाएंगे जिनके पास इसका कानूनी हक है। फर्जी तरीके से नागरिकता लेने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी, चाहे यह धोखाधड़ी कितने भी साल पहले हुई हो। ऐसे लोगों को पब्लिक प्रॉसिक्यूशन (Public Prosecution) को सौंपा जाएगा और सरकार से लिए गए गलत फायदे या पैसे को भी वापस वसूला जाएगा।

हालांकि, प्रशासन ने यह भी कहा है कि जो लोग कानून के हिसाब से अपना कानूनी स्टेटस सही कर लेंगे, उन्हें कुवैत में रहने और काम करने की अनुमति होगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.