कुवैत में मौजूदा क्षेत्रीय हालात को देखते हुए सरकार ने कई बड़े बदलाव किए हैं. फर्स्ट डिप्टी पीएम और गृह मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबा की अध्यक्षता में सिविल डिफेंस कमेटी ने इमरजेंसी की तैयारियों की समीक्षा की है. इस बैठक में देश के अंदरूनी मोर्चे को सुरक्षित रखने और रणनीतिक सुविधाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया. इसके साथ ही प्रवासियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए कई नए नियम लागू किए गए हैं जिनका सीधा असर कुवैत में काम कर रहे भारतीयों पर पड़ेगा.

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प्रवासियों के लिए Sahl App पर नया नियम क्या है?

कुवैत में काम करने वाले प्रवासियों के लिए यात्रा के नियमों में अहम बदलाव किया गया है. आर्टिकल 17 (सरकारी) और आर्टिकल 18 (प्राइवेट) वीजा पर रह रहे लोगों को अब कुवैत से बाहर जाने से पहले Sahl App के जरिए ऑटोमेटेड एग्जिट परमिट लेना अनिवार्य कर दिया गया है. जो निवासी फिलहाल कुवैत से बाहर हैं, उनके लिए तीन महीने का एब्सेंस परमिट लागू किया गया है. इसके अलावा राहत की बात यह है कि सभी विजिटर वीजा की अवधि को अपने आप एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है.

सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में क्या बदलाव हुए हैं?

सरकार ने इमरजेंसी प्लान के तहत दफ्तरों और आम जनजीवन के लिए नई गाइडलाइन जारी की है.

  • सरकारी विभागों में अब सिर्फ 30 प्रतिशत कर्मचारी ही दफ्तर आकर काम करेंगे, बाकी कर्मचारी रोटेशन के आधार पर अपनी ड्यूटी पूरी करेंगे.
  • बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी गई है.
  • समुद्र में मछली पकड़ने और बोट ट्रिप पर जाने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है.
  • खतरनाक इंडस्ट्रियल साइट्स पर काम करने वालों को सायरन बजते ही काम रोकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं.

देश की सुरक्षा के लिए सरकार की क्या तैयारी है?

गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में सुरक्षा के हालात पूरी तरह स्थिर हैं और 24 घंटे इसकी निगरानी की जा रही है. एयरपोर्ट और फ्यूल टैंक जैसी जरूरी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. सेना और सिविल विभागों के बीच तालमेल को और मजबूत किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत फैसला लिया जा सके. सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सिर्फ सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें.