कुवैत सरकार ने युद्ध के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्रालय की असिस्टेंट मिनिस्टर शेखा जावेहर इब्राहिम अल-दुइज़ अल-सबाह ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) के नियमों को मानने की बात कही है। उनका कहना है कि युद्ध के समय आम लोगों और सैनिकों के बीच अंतर करना बहुत जरूरी है ताकि बेगुनाहों की जान बचाई जा सके।

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क्या है अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का ‘डिस्टिंक्शन’ नियम?

इस नियम के मुताबिक, युद्ध लड़ने वाले पक्षों को हमेशा आम नागरिकों और सैनिकों के बीच फर्क करना होगा। हमले केवल सैन्य ठिकानों पर ही किए जा सकते हैं, आम लोगों के घरों या ठिकानों पर नहीं। ऐसे हथियारों का इस्तेमाल पूरी तरह मना है जो आम लोगों और फौजियों में फर्क न कर सकें, जैसे कि एंटी-पर्सनेल माइंस।

कुवैत ने अपनी सुरक्षा और कानूनों में क्या बदलाव किए?

  • मई 2026: शेखा जावेहर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लापता लोगों और नागरिकों के खिलाफ अपराधों पर चिंता जताई और जवाबदेही तय करने की बात कही।
  • फरवरी 2026: जस्टिस मिनिस्टर नासिर अल-सुमैत ने शेखा जावेहर को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की स्थायी राष्ट्रीय समिति का महासचिव नियुक्त किया।
  • जुलाई 2025: रेड क्रिसेंट प्रतीक की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर कुवैती अदालतों को अधिकार देने के लिए दो नए ड्राफ्ट कानून तैयार किए गए।
  • दिसंबर 2025: कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवीय कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और सहायता सामग्री की सुरक्षित पहुंच की मांग की।

ICRC और अन्य देशों के साथ कुवैत का तालमेल

इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) के प्रतिनिधि मामदू सो ने कुवैत की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि कुवैत मानवीय मुद्दों को उठाने और स्थानीय कानून बनाने में एक मजबूत पार्टनर है। इसके अलावा, कुवैत GCC देशों के साथ मिलकर मानवाधिकारों के लिए काम कर रहा है और 2024-2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सदस्य भी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कुवैत का नया नियम क्या है?

कुवैत अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) के तहत ‘प्रिंसिपल ऑफ डिस्टिंक्शन’ को मान रहा है, जिसका मतलब है कि युद्ध के समय नागरिकों और सैनिकों के बीच फर्क किया जाए ताकि आम लोगों की जान बच सके।

शेखा जावेहर अल-सबाह की क्या भूमिका है?

वह विदेश मंत्रालय में मानवाधिकारों के लिए असिस्टेंट मिनिस्टर हैं और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की स्थायी राष्ट्रीय समिति की महासचिव के तौर पर काम कर रही हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.