कुवैत सरकार ने यरूशलेम में अल-अक्सा मस्जिद और अन्य धार्मिक स्थलों पर इबादत करने से रोकने के फैसले की कड़ी निंदा की है। Kuwait Ministry of Foreign Affairs ने 31 मार्च 2026 को एक बयान जारी कर इन पाबंदियों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। इस विरोध में कुवैत के साथ दुनिया के 8 और बड़े देश भी शामिल हुए हैं जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

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कुवैत विदेश मंत्रालय ने पाबंदियों पर क्या कहा?

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि Al-Aqsa Mosque पर सिर्फ मुसलमानों का अधिकार है और इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी Jordan के पास है। बयान में कहा गया कि लोगों को उनकी आस्था के हिसाब से प्रार्थना करने से रोकना मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय संधियों के खिलाफ है। मंत्रालय ने UN Security Council से अपील की है कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाए और पवित्र स्थलों की मर्यादा बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए।

8 देशों का साझा बयान और अन्य पाबंदियों का विवरण

इस मुद्दे पर कुवैत के अलावा कई अन्य देशों ने भी नाराजगी जताई है। सऊदी अरब, यूएई, कतर, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, जॉर्डन और मिस्र ने मिलकर एक साझा बयान जारी किया है। इन देशों ने इन पाबंदियों से जुड़ी मुख्य बातों को उजागर किया है:

  • Al-Aqsa Mosque को रमजान के पवित्र महीने के दौरान लगातार 30 दिनों तक बंद रखा गया है।
  • मुस्लिमों के साथ-साथ ईसाई धर्मगुरुओं को भी उनके पवित्र स्थलों पर जाने से रोका गया है।
  • Catholic Church in Kuwait के प्रवक्ता ने बताया कि Cardinal Pierbattista Pizzaballa को Church of the Holy Sepulchre में जाने से रोकना धार्मिक आजादी का अपमान है।
  • 8 देशों ने मांग की है कि यरूशलेम में धार्मिक स्थलों की ऐतिहासिक स्थिति के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए।

धर्मगुरुओं और चर्च की ओर से दर्ज कराया गया विरोध

कुवैत में ईसाई धर्मगुरुओं ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। फादर सुलेमान हैफौई ने कहा कि सदियों में यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर धर्मगुरुओं को चर्च में प्रवेश करने से रोका गया है। इससे दुनिया भर के करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। कुवैत और अन्य खाड़ी देशों के लिए यह मामला काफी संवेदनशील है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में प्रवासी रहते हैं जो इन धार्मिक स्थलों से गहरा लगाव रखते हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.