कुवैत की अदालत ने एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। यहाँ एक खाड़ी देश की लड़की और उसके पिता को मृत कुवैती नागरिक बनकर धोखाधड़ी करने का दोषी पाया गया। अदालत ने दोनों को 7 साल की जेल और भारी जुर्माना सुनाया है।

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क्या था पूरा मामला और कैसे हुई धोखाधड़ी?

इस मामले में आरोपियों ने साल 1995 से 2025 तक एक मृत कुवैती नागरिक की पहचान का इस्तेमाल किया। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर और फर्जीवाड़ा किया ताकि वे खुद को कुवैती नागरिक बता सकें। इस धोखाधड़ी को उन्होंने करीब तीन दशकों तक जारी रखा और सिस्टम को धोखा दिया।

अदालत ने क्या सजा सुनाई और क्या मिला था गलत लाभ?

Counselor Dr. Khalid Al-Omaira की अध्यक्षता वाली Criminal Court ने दोनों दोषियों को 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर 15 लाख (1.5 million) कुवैती दीनार का जुर्माना भी लगाया गया। जांच में पता चला कि आरोपियों ने इस फर्जी पहचान के जरिए सरकारी वेतन, रिटायरमेंट पेंशन और सरकार की तरफ से मिलने वाला घर भी अवैध रूप से हासिल किया था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यह फर्जीवाड़ा कितने समय तक चला?

यह धोखाधड़ी साल 1995 में शुरू हुई थी और 2025 तक जारी रही, यानी करीब 30 सालों तक आरोपियों ने मृत व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किया।

अदालत ने दोषियों पर कितना जुर्माना लगाया है?

कुवैत की अदालत ने दोषी पिता और बेटी पर कुल 15 लाख कुवैती दीनार का जुर्माना लगाया है और 7 साल की जेल की सजा सुनाई है।