कुवैत की एक अदालत ने फर्जी तरीके से कुवैती नागरिकता हासिल करने वाले एक सऊदी नागरिक को कड़ी सजा सुनाई है। इस शख्स ने करीब 30 साल तक सिस्टम को धोखा दिया और सरकारी पदों पर भी काम किया। अब अदालत ने उसे 7 साल की जेल और भारी आर्थिक जुर्माना भरने का आदेश दिया है।
नागरिकता के लिए कैसे किया गया फर्जीवाड़ा
यह मामला साल 1993 से शुरू हुआ और 2025 तक चला। आरोपी शख्स ने करीब 35,000 कुवैती दीनार देकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और खुद को एक कुवैती नागरिक का बेटा बताकर नागरिकता ले ली। इस धोखाधड़ी को पकड़ने के लिए Nationality Investigations Department ने बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल किया और उसकी सऊदी आईडी की फोटो से मिलान किया जिससे पूरा सच सामने आ गया। अदालत ने इस साजिश में शामिल आरोपी के पिता को भी गैर-मौजूदगी में 7 साल की जेल की सजा सुनाई है।
फर्जी नागरिकता से मिले फायदे और कानूनी सजा
जांच में पता चला कि आरोपी ने इस फर्जी नागरिकता का इस्तेमाल करके सरकारी नौकरियों में जगह बनाई। उसने रक्षा मंत्रालय में कॉर्पोरल और आंतरिक मंत्रालय में पुलिस अधिकारी के तौर पर काम किया। इस दौरान उसे 105,000 कुवैती दीनार से ज्यादा का वेतन, वित्तीय लाभ, लोन और पेंशन मिली। सजा के तौर पर अदालत ने उसे 7 साल जेल और 316,000 कुवैती दीनार (करीब 38 लाख दिरहम) का जुर्माना लगाया है।
कुवैत सरकार के सख्त नए नियम
कुवैत सरकार ने नागरिकता कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं। अब गलत जानकारी देने पर 3 साल और जानबूझकर धोखाधड़ी करने पर 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। आंतरिक मंत्री शेख फहद अल-यूसुफ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कमेटी फॉर सिटिजनशिप इन्वेस्टिगेशन ने हाल ही में 1266 लोगों की नागरिकता वापस ली है। अब पहचान की पुष्टि के लिए DNA टेस्ट और बायोमेट्रिक पहचान का इस्तेमाल किया जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी नागरिक को कुवैत की अदालत ने क्या सजा सुनाई?
अदालत ने आरोपी को 7 साल की जेल और 316,000 कुवैती दीनार (लगभग 38 लाख दिरहम) का जुर्माना लगाया है। उसके पिता को भी 7 साल की जेल की सजा मिली है।
धोखाधड़ी का खुलासा कैसे हुआ?
नेशनलिटि इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने आरोपी के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का मिलान उसकी सऊदी पहचान पत्र (ID) की तस्वीर से किया जिससे फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।