Kuwait के क्राउन प्रिंस ने 17 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र (UN) की वरिष्ठ प्रतिनिधि Mari Yamashita से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उन लापता कुवैती नागरिकों और उनकी संपत्ति को वापस लाने के प्रयासों पर चर्चा करना था। यह पूरी प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2792 के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।

क्या है सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2792

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 17 सितंबर 2025 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव 2792 (2025) को मंजूरी दी थी। इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद इराक और कुवैत के बीच के पुराने मसलों को सुलझाना है। इसके तहत एक वरिष्ठ प्रतिनिधि की नियुक्ति की गई ताकि लापता कुवैती और तीसरे देश के नागरिकों, या उनके अवशेषों और राष्ट्रीय अभिलेखागार (national archives) सहित कुवैती संपत्ति को वापस लाने के काम में मदद मिल सके।

Mari Yamashita की भूमिका और नियुक्ति

यूएन महासचिव António Guterres ने 31 मार्च 2026 को Mari Yamashita को इस जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया। जापान की रहने वाली Mari Yamashita के पास संयुक्त राष्ट्र में शांति निर्माण और कूटनीति का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उनका काम लापता लोगों और संपत्ति से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तालमेल बिठाना और प्रगति करना है।

बैकग्राउंड और समय सीमा

यह नया सिस्टम तब शुरू हुआ जब 31 दिसंबर 2025 को इराक में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMI) का कार्यकाल खत्म हो गया। अमेरिका ने भी इस फैसले का स्वागत किया था और इसे एक समयबद्ध प्रक्रिया बताया था। सुरक्षा परिषद 31 दिसंबर 2030 तक इस निगरानी की जरूरत पर विचार करेगी, लेकिन अगर काम समय से पहले पूरा हो गया तो यह समीक्षा उससे पहले भी की जा सकती है।