कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने सोमवार के कारोबारी दिन में कच्चे तेल की कीमतों में बड़े उछाल की आधिकारिक जानकारी दी है। सोमवार को हुई ट्रेडिंग के दौरान कुवैती तेल की कीमत 6.58 डॉलर बढ़कर 163.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) ने मंगलवार 24 मार्च 2026 को इस खबर की पुष्टि की। तेल के दामों में यह तेजी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण सप्लाई चैन पर दबाव बना हुआ है।

कुवैत में तेल की कीमतों में अचानक इतनी तेजी क्यों आई?

कीमतों में यह उछाल क्षेत्रीय तनाव और तेल रिफाइनरी पर हुए हालिया हमलों का नतीजा है। 20 मार्च को कुवैत की मीना अल-अहमदी (Mina al-Ahmadi) रिफाइनरी पर ड्रोन हमलों की घटना सामने आई थी, जिसके बाद सुरक्षा के तौर पर कई यूनिट्स को बंद करना पड़ा। इसके अलावा, कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने पहले ही तेल उत्पादन में एहतियातन कमी करने का ऐलान किया था। ईरान की धमकियों और समुद्री रास्तों में सुरक्षा के खतरों को देखते हुए बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता कम हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।

पिछले कुछ दिनों में तेल के दामों में क्या उतार-चढ़ाव आए?

पिछले एक हफ्ते के दौरान कुवैती कच्चे तेल की कीमतों में काफी ज्यादा बदलाव देखे गए हैं। नीचे दी गई टेबल से आप कीमतों में आए अंतर को समझ सकते हैं:

तारीख घटना / स्थिति कीमत (प्रति बैरल)
20 मार्च 2026 मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर हमला
21 मार्च 2026 शुक्रवार की ट्रेडिंग के बाद भाव $156.50
23 मार्च 2026 सोमवार की ट्रेडिंग में $6.58 की बढ़त $163.08

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) की स्थिति घोषित की हुई है। इसका मुख्य कारण खाड़ी क्षेत्र में कच्चे तेल और उत्पादों को ले जाने के लिए जहाजों की भारी कमी होना है।

प्रवासियों और आम जनता पर इस खबर का क्या असर होगा?

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। कुवैत में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है क्योंकि क्षेत्रीय तनाव और समुद्री परिवहन में आ रही दिक्कतों से जरूरी सामानों की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना रहती है। KPC ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन में की गई कटौती पूरी तरह से एहतियाती कदम है। कंपनी ने भरोसा दिया है कि वह घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है और हालात ठीक होते ही उत्पादन स्तर को फिर से सामान्य कर दिया जाएगा।