कुवैत के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स ने अब ज़मीनी रास्ते से आने वाले सामान (land shipments) के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्री-क्लियरेंस सिस्टम शुरू कर दिया है। इस कदम का मकसद कस्टम की लंबी प्रक्रियाओं को खत्म करना और व्यापार को और भी आसान बनाना है। इस नए सिस्टम से अब इम्पोर्टर्स को अपने सामान के लिए बॉर्डर पर लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा और कागजी कार्रवाई में भी कमी आएगी।

नियम और प्रक्रिया

यह नई व्यवस्था कस्टम इंस्ट्रक्शन नंबर (24) ऑफ 2026 के तहत लागू की गई है। इसके जरिए अब सामान के बॉर्डर पर पहुँचने से पहले ही ज़रूरी कागज़ात और जानकारी ऑनलाइन जमा की जा सकेगी। इससे सामान की रिलीज की प्रक्रिया तेज़ होगी और व्यापार करने वाले लोगों को सुविधा होगी।

इस नए सिस्टम के तहत कुछ मुख्य बातें तय की गई हैं:

  • इम्पोर्टर या उनके कानूनी प्रतिनिधि ऑटोमेटेड कस्टम सिस्टम के ज़रिए प्री-क्लियरेंस की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
  • सभी कमर्शियल इम्पोर्ट डिक्लेरेशन सिर्फ एक लाइसेंसी कुवैती कस्टम ब्रोकर के ज़रिए ही फाइल किए जा सकेंगे।
  • इम्पोर्टर्स को खुद से फाइलिंग करने की अनुमति नहीं दी गई है।
  • अगर रजिस्ट्रेशन की तारीख से ज़्यादा से ज़्यादा 30 दिनों के भीतर सामान नहीं पहुँचता है, तो कस्टम डिक्लेरेशन अपने आप रद्द हो जाएगा।

कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) ने 18 जून 2026 को इस बदलाव की जानकारी दी। सरकार का यह फैसला डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्लान का हिस्सा है। इसका मुख्य लक्ष्य बॉर्डर पर ट्रकों के वेटिंग टाइम को कम करना और पूरे कस्टम सिस्टम को और ज़्यादा पारदर्शी और आधुनिक बनाना है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.