कुवैत सरकार ने व्यापार को आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब ज़मीन के रास्ते आने वाले सामान के लिए नया इलेक्ट्रॉनिक प्री-क्लियरेंस सिस्टम शुरू किया गया है। इससे व्यापारियों और आयात करने वालों को बॉर्डर पर लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा और सामान की आवाजाही तेज़ हो जाएगी।
Kuwait’s General Administration of Customs (GAC) ने इस सिस्टम को शुरू किया है। इस नई व्यवस्था के तहत, अब सामान मंगाने वाले लोग या उनके कानूनी प्रतिनिधि सामान के बॉर्डर पर पहुँचने से पहले ही ज़रूरी कागज़ात और कस्टम डिक्लेरेशन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
नियम और शर्तें
इस सिस्टम को Customs Circular No. 24 of 2026 के ज़रिए लागू किया गया है। इसके कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- जमा करने की प्रक्रिया: सामान के फिजिकल तौर पर कस्टम विभाग पहुँचने से पहले ही ऑटोमेटेड सिस्टम के ज़रिए कागज़ात जमा किए जा सकते हैं।
- समय सीमा: अगर रजिस्ट्रेशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर सामान बॉर्डर पर नहीं पहुँचता है, तो कस्टम डिक्लेरेशन अपने आप रद्द हो जाएगा।
- पुराना तरीका: जो लोग पुराने तरीके से क्लीयरेंस कराना चाहते हैं, उनके लिए पारंपरिक प्रक्रिया अभी भी चालू रहेगी।
इस बदलाव का सीधा असर उन भारतीय व्यापारियों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों पर पड़ेगा जो कुवैत में अपना कारोबार करते हैं। अब उन्हें कागज़ी कार्रवाई के लिए बॉर्डर पर समय बर्बाद नहीं करना होगा, जिससे सामान की डिलीवरी जल्दी होगी और खर्चा भी कम होगा।
अन्य नए बदलाव
कस्टम विभाग ने कुछ और निर्देश भी जारी किए हैं। Customs Circular No. 23 के मुताबिक, अब डिपॉजिट स्टेटमेंट और एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन के लिए स्टैम्प ड्यूटी का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक तरीके से करना होगा। इसके अलावा, Customs Circular No. 25 के तहत GCC देशों को सामान भेजने वाली AEO कंपनियों के लिए तेज़ लेन (Fast Lanes) की सुविधा दी गई है, जिसके लिए उन्हें अपना पहचान कोड देना होगा।
Customs Ports Affairs के डिप्टी डायरेक्टर जनरल Saleh Al-Omar ने बताया कि विभाग अब आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहा है। इससे रिस्की शिपमेंट की पहचान करना आसान होगा और बॉर्डर पर काम बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।