कुवैत में पानी साफ करने वाले एक बड़े प्लांट (डीसैलिनेशन प्लांट) पर हुए हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। रविवार शाम को हुए इस हमले में एक भारतीय कर्मचारी की जान चली गई और प्लांट की इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान की सेना ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का दावा है कि इजरायल ने उसे बदनाम करने और युद्ध के हालात पैदा करने के लिए कुवैत के इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।

कुवैत में हुए हमले और भारतीय नागरिकों पर असर

कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि हमले में प्लांट की एक सर्विस बिल्डिंग तबाह हो गई है। इस संघर्ष में भारतीय प्रवासियों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। दिल्ली में अतिरिक्त सचिव असीम महाजन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया के संघर्ष में अब तक 8 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जिसमें कुवैत प्लांट का यह ताजा मामला भी शामिल है।

  • हमले में एक भारतीय कर्मचारी की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।
  • कुवैत के अधिकारियों के अनुसार, पानी और बिजली की सप्लाई फिलहाल सामान्य बनी हुई है।
  • तकनीकी टीमें और राहत दल मौके पर स्थिति को संभालने में जुटे हैं।
  • कतर ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।

मिसाइल और ड्रोन हमलों के ताजा आंकड़े

कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पिछले एक महीने के दौरान देश पर हुए हमलों का विवरण साझा किया है। मंत्रालय ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। पिछले 24 घंटों में भी कई मिसाइलों को ट्रैक किया गया है।

हमले का प्रकार कुल हमले (एक महीना) पिछले 24 घंटों का अपडेट
बैलिस्टिक मिसाइलें 307 14 मिसाइलें
ड्रोन हमले 616 12 ड्रोन
क्रूज़ मिसाइलें 2 0
घायल जवान 10 (सैनिक)

क्षेत्र में अन्य सैन्य गतिविधियां

कुवैत के अलावा क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमलों के कारण रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा है। वहीं, स्पेन ने ईरान पर हमलों में शामिल होने वाले अमेरिकी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का फैसला किया है। ईरान ने भी अपने रिवोल्यूशनरी गार्ड नेवी के चीफ अलीरेजा तंगसिरी की मौत की पुष्टि कर दी है, जिन्हें लेकर इजरायल ने हमले का दावा किया था। इन घटनाओं ने खाड़ी में काम कर रहे भारतीय प्रवासियों और स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है।