कुवैत में 16 जुलाई 2026 की सुबह बड़ा तनाव पैदा हो गया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि देश के एयरस्पेस में 32 दुश्मन ड्रोन देखे गए जिन्हें सेना ने इंटरसेप्ट किया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता Major General Saud Abdulaziz Al-Otaibi ने इन हमलों की पुष्टि की और इसके पीछे ईरान का हाथ बताया है।
हमले से जुड़ी मुख्य जानकारियां
इस हमले में कुवैत के कई जरूरी ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन को गिराने की प्रक्रिया के दौरान कई रिहायशी इलाकों में उनका मलबा गिरा, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। अच्छी बात यह है कि किसी भी नागरिक की जान को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को देश की संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताया। मंत्रालय ने साफ कहा कि इस हमले के लिए ईरान पूरी तरह जिम्मेदार है। कुवैत की सेना देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है और नागरिकों तथा वहां रहने वाले प्रवासियों की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही है।
ईरान का क्या दावा है
ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया कि उन्होंने कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों जैसे Ali Al Salem Air Base और Shuaiba Port को निशाना बनाया है। उनका दावा है कि उन्होंने रडार सिस्टम और अन्य सैन्य उपकरणों को नष्ट किया है। इसके अलावा Bahrain और Jordan में भी इसी तरह के हमले की खबरें सामने आई हैं।
