कुवैत और मिस्र ने अब खाने-पीने की चीज़ों की सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए हाथ मिलाया है। दुनिया भर में बदलती आर्थिक स्थितियों के बीच दोनों देशों ने इसे अपनी प्राथमिकता बनाया है। इस कदम का मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि आम लोगों को ज़रूरी सामान बिना किसी परेशानी के मिलते रहें और सप्लाई चेन मज़बूत रहे।
इस सिलसिले में कई अहम बैठकें हुई हैं। 1 सितंबर 2025 को मिस्र के कृषि मंत्री Alaa Farouk ने कुवैत में मिस्र के नए राजदूत Mohamed Gaber Abou El Wafa से मुलाकात की। इस दौरान ज़मीन के सुधार, मुर्गी पालन, मछली पालन और कृषि उत्पादों को कुवैत भेजने पर चर्चा हुई। वहीं 30 अक्टूबर 2025 को मिस्र के राष्ट्रपति Abdel Fattah El-Sisi और कुवैत के प्रधानमंत्री Sheikh Ahmad Abdullah Al-Ahmad Al-Sabah ने निवेश और व्यापार को बढ़ाने पर सहमति जताई।
सबसे ताज़ा जानकारी के मुताबिक, 29 अप्रैल 2026 को मिस्र के राजदूत Mohamed Abul Wafa और कुवैत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Osama Boodai ने खाद्य सुरक्षा पर खास बातचीत की। दोनों नेताओं ने व्यापार को बढ़ावा देने और विकास के लिए साझेदारी बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
दूसरी तरफ, कुवैत सरकार ने स्थानीय बाज़ार को स्थिर रखने के लिए कुछ कड़े कदम भी उठाए हैं। 4 मार्च 2026 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के फैसले (Decision No. 20 of 2026) के बाद कुवैत के सीमा शुल्क प्रशासन ने सभी खाद्य उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के अंदर सामान की कमी न हो।
बाज़ार में कीमतों को कंट्रोल करने के लिए भी सख्ती बरती जा रही है। 8 मार्च 2026 को कमर्शियल कंट्रोल और कंज्यूमर प्रोटेक्शन विभाग के डायरेक्टर Faisal Al Ansari ने बताया कि सरकारी टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं ताकि ज़रूरी सामान सही दाम पर उपलब्ध रहें।
कुवैत अपनी ज़रूरत का 90 प्रतिशत से ज़्यादा खाना बाहर से मंगवाता है। इसलिए अब सरकार आयात पर निर्भरता कम करने के लिए हाइड्रोपोनिक फार्मिंग और एक्वाकल्चर जैसी नई तकनीकों में निवेश कर रही है। वहीं मिस्र भी खेती में नई तकनीक और पानी के बेहतर मैनेजमेंट पर काम कर रहा है ताकि अपनी पैदावार बढ़ा सके।
