कुवैत में काम करने वाले भारतीयों और बिजनेस जगत के लिए एक बड़ी खबर आई है. भारत की जानी-मानी कंपनी Larsen & Toubro (L&T) ने वहां एक बहुत बड़ा तेल प्रोजेक्ट हासिल किया है. यह प्रोजेक्ट कुवैत के तेल निर्यात बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए है, जिसकी कुल कीमत करीब 988 मिलियन डॉलर है.
प्रोजेक्ट में क्या काम होगा और इसकी कीमत कितनी है?
L&T कंपनी को यह कॉन्ट्रैक्ट कुवैत के तेल निर्यात सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए मिला है. इसमें मुख्य रूप से कच्चे तेल के भंडारण (storage) के लिए नई सुविधाएं तैयार करना शामिल है. कंपनी ‘Kuwait Export Crude’ और ‘Jurassic crude’ के लिए स्टोरेज बनाएगी और पुराने सिस्टम को अपडेट करेगी. इस टेंडर के लिए L&T ने 303.5 मिलियन कुवैती दीनार की बोली लगाई थी, जबकि एक ब्रिटिश कंपनी की बोली करीब 1.01 बिलियन डॉलर थी, जिससे L&T इस दौड़ में आगे निकल गई.
कुवैत सरकार और KOC की क्या योजना है?
इस बड़े प्रोजेक्ट को Kuwait Oil Company (KOC) द्वारा दिया जा रहा है और इसे सरकारी संस्था Central Agency for Public Tenders (CAPT) ने अपनी मंजूरी दे दी है. कुवैत की पेरेंट कंपनी KPC ने साल 2050 तक के लिए 410 अरब डॉलर के निवेश का एक बड़ा प्लान बनाया है. उनका मकसद साल 2035 तक कच्चे तेल के उत्पादन की क्षमता को बढ़ाकर 4 मिलियन बैरल प्रतिदिन करना है.
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (दीनार) | 303.5 मिलियन कुवैती दीनार |
| कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (डॉलर) | लगभग 988 मिलियन डॉलर |
| प्रतिस्पर्धी कंपनी की बोली | करीब 1.01 बिलियन डॉलर (UK फर्म) |
| KPC कुल निवेश (2050 तक) | 410 अरब डॉलर |
| तेल उत्पादन लक्ष्य (2035) | 4 मिलियन बैरल प्रतिदिन |
Frequently Asked Questions (FAQs)
कुवैत का यह बड़ा प्रोजेक्ट किस भारतीय कंपनी को मिला है?
यह प्रोजेक्ट भारत की दिग्गज इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी Larsen & Toubro (L&T) को मिला है.
इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद क्या है?
इसका मुख्य मकसद कुवैत में कच्चे तेल के निर्यात के लिए नए स्टोरेज बनाना और वहां के तेल बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है.
