कुवैत में रहने वाले भारतीयों के जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित एक नई किताब ‘Pravasathinte Nalpathandukal’ रिलीज हुई है। यह किताब पिछले 40 सालों के प्रवासी जीवन की पूरी कहानी बताती है। इसे पढ़ने वालों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है क्योंकि इसमें प्रवासियों के असली अनुभवों को जगह दी गई है।
किताब और लेखक की जानकारी
इस किताब को अनुभवी पत्रकार और लेखक Sam Geevarghese Daniel ने लिखा है, जिन्हें लोग Sam Pynummoodu के नाम से जानते हैं। सैम पायनुमुडु पिछले चार दशकों से कुवैत में रह रहे हैं। उन्होंने 1992 से 2022 तक मलयालम अखबार Deshabhimani के कुवैत संवाददाता के तौर पर काम किया और वे Lok Kerala Sabha के सदस्य भी रहे हैं।
इस किताब में उन्होंने अपने निजी अनुभवों के साथ-साथ कुवैत के इतिहास की बड़ी घटनाओं को शामिल किया है। इसमें बताया गया है कि कैसे हजारों प्रवासियों के सपनों और बलिदानों ने कुवैत की अर्थव्यवस्था और केरल की तरक्की में मदद की।
किताब की खास बातें
यह किताब कुल 40 अध्यायों में बंटी हुई है। इसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर बात की गई है जिससे एक आम प्रवासी खुद को जोड़ सकता है। किताब के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- इराक का कुवैत पर हमला और उसके बाद हुई आजादी की कहानी।
- युद्ध के बाद कुवैत का फिर से निर्माण और उसमें प्रवासियों का योगदान।
- विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच मलयालम भाषा और संस्कृति को बचाए रखने की कोशिशें।
- समय के साथ प्रवासी समुदाय के तौर-तरीकों में आए बदलाव।
किताब की शुरुआत ‘बाइबल में प्रवास’ के जिक्र से होती है और इसका अंत ‘व्यवसाय से समृद्ध अरबी साहित्य’ पर होता है। इसे उन सभी प्रवासियों के प्रति एक सम्मान के रूप में देखा जा रहा है जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से कुवैत के समाज और केरल की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया।
