कुवैत यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिक्स प्रोफेसर डॉ. रियाद अल-फारेस ने दुनिया भर में आर्थिक मंदी को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में हलचल तेज हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस स्थिति से आने वाले समय में महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर आम जनता पर होगा। राजनीतिक बयानों और प्रशासनिक फैसलों की वजह से एनर्जी सेक्टर और स्टॉक मार्केट में बड़े झटके लग रहे हैं।

आखिर क्यों बढ़ रहा है दुनिया में आर्थिक मंदी का खतरा?

प्रोफेसर रियाद अल-फारेस ने कुवैत टीवी के साथ बातचीत में बताया कि दुनिया के बड़े देशों के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी शेयर बाजार और ऊर्जा बाजार को नुकसान पहुंचा रही है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का पांचवां हफ्ता चल रहा है, जिससे इंटरनेशनल मार्केट काफी डरा हुआ है। अगर यह तनाव कम नहीं हुआ, तो साल 2026 में दुनिया की विकास दर 4 फीसदी से गिरकर 1.5 फीसदी पर आ सकती है। तेल की कीमतों में 50 से 66 फीसदी तक का उछाल देखा जा रहा है, जिससे सप्लाई चेन पर भारी दबाव बन रहा है।

गल्फ देशों और प्रवासियों पर क्या असर पड़ने की संभावना है?

  • गल्फ देशों के पास दुनिया का 50 प्रतिशत से ज्यादा तेल और 30 प्रतिशत गैस भंडार है।
  • तेल की बढ़ती कीमतें गल्फ देशों की कमाई बढ़ा सकती हैं लेकिन इससे रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ेंगे।
  • भारत जैसे देशों से खाड़ी देशों में रहने आए प्रवासियों के लिए महंगाई बढ़ने से बचत कम हो सकती है।
  • सेंट्रल बैंक फिलहाल महंगाई को काबू में रखने के लिए नए रास्ते तलाश रहे हैं।
  • एशियाई बाजारों में ऊर्जा की कमी से कीमतों में और ज्यादा तेजी आने की उम्मीद है।
  • प्रोफेसर ने इस स्थिति को मिलिट्री युद्ध के बजाय एनर्जी वार का नाम दिया है।