अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण खाड़ी देशों में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं. इसका सीधा असर अब खाने-पीने की चीजों पर पड़ने लगा है. कुवैत के गवर्नमेंट कम्युनिकेशन सेंटर ने देश में खाने-पीने के सभी सामानों के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी है. यह फैसला घरेलू बाजार को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है. फूड सिक्योरिटी एक्सपर्ट Mohammad Al-Furaih ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध कुछ और महीने चला तो दुनिया को एक बड़े खाद्य संकट का सामना करना पड़ेगा. कुवैत जैसे देश जो पूरी तरह से आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है.

Kuwait सरकार ने क्यों लगाई Export पर रोक?

कुवैत सरकार ने घरेलू बाजार में खाने-पीने की कमी न हो, इसके लिए सभी तरह के खाद्य पदार्थों के एक्सपोर्ट पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. यह रोक जमीन, समुद्र और हवाई सभी रास्तों पर लागू की गई है. इसके साथ ही वित्त मंत्रालय ने एक नया आदेश भी जारी किया है.

इस नए आदेश के तहत कुवैत इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और सेंट्रल बैंक ऑफ कुवैत को जरूरी फंड सुरक्षित करने का अधिकार दिया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना और इस संकट के समय देश में जरूरी सप्लाई को बनाए रखना है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुवैत को इस संकट का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र और ग्रीनहाउस फार्मिंग में निवेश बढ़ाने के लिए करना चाहिए, ताकि गैर-तेल राजस्व बढ़ाया जा सके. सऊदी अरब ने अपने यहां गेहूं और कॉफी का उत्पादन बढ़ाकर खुद को काफी मजबूत किया है.

Fertilizer और ट्रांसपोर्टेशन पर क्या असर पड़ रहा है?

युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने की स्थिति में है. यहां से दुनिया भर का 20 से 30 प्रतिशत फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट होता है. इस रास्ते के प्रभावित होने से खाड़ी देशों में नाइट्रोजन फर्टिलाइजर का उत्पादन लगभग रुक गया है, खासकर कतर के एक बड़े प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद.

  • यूरिया की कीमत: एक हफ्ते के अंदर यूरिया की कीमतों में 32 प्रतिशत का भारी उछाल आया है और यह 683 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया है.
  • जहाजों की आवाजाही: समुद्र में माइन और सैन्य खतरे के कारण लगभग 170 जहाज खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिनमें 450,000 कंटेनर मौजूद हैं.
  • पानी की सप्लाई: बहरीन और ईरान में डिसेलिनेशन प्लांट पर हमले हुए हैं. कुवैत और यूएई में 90 प्रतिशत पीने का पानी इन्हीं प्लांट से आता है, जिससे पानी का संकट गहरा सकता है.
  • गैस सप्लाई: इजराइल से गैस सप्लाई रुकने के कारण इजिप्ट में भी यूरिया के दाम 650 डॉलर प्रति टन के पार चले गए हैं.
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.