कुवैत के विदेश मंत्री शेख जराह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ने तुर्की की राजधानी अंकारा में राष्ट्रपति रेसेप तय्यप एर्दोगन से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने और क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने पर विस्तार से बात हुई। यह मुलाकात सोमवार, 4 मई 2026 को राष्ट्रपति परिसर में बंद कमरे में हुई जिसमें तुर्की के कई बड़े अधिकारी भी मौजूद थे।

👉: UAE Tanker Attack: ईरान के ड्रोन हमले से हड़कंप, जॉर्डन ने कहा यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

कुवैत और तुर्की के बीच व्यापार और रक्षा सहयोग में क्या बदलाव आएंगे?

दोनों देशों ने अपने आपसी रिश्तों को और बेहतर बनाने पर जोर दिया है। बैठक के दौरान सैन्य, रक्षा और कनेक्टिविटी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। व्यापार के मोर्चे पर एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है।

  • व्यापार लक्ष्य: 2025 के अंत तक दोनों देशों के बीच व्यापार 1 अरब डॉलर से अधिक था, जिसे बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है।
  • फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: तुर्की और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत चल रही है, जिससे निवेश और व्यापार को और बढ़ावा मिलेगा।
  • शांति समिति: तुर्की और कुवैत दोनों इस शांति समिति के संस्थापक सदस्य हैं और इसके कामकाज पर भी चर्चा हुई।

गाजा और क्षेत्रीय तनाव पर क्या रही चर्चा?

बैठक में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी गंभीर बातचीत हुई। तुर्की ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मदद करने की बात कही ताकि संघर्ष को जल्द खत्म किया जा सके।

  • गाजा और वेस्ट बैंक: इसराइल की नीतियों पर चिंता जताई गई। बातचीत में गाजा युद्धविराम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने और वहां मानवीय स्थितियों को सुधारने की मांग की गई।
  • समुद्री रास्ता: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के आने-जाने की आजादी को बनाए रखने को बहुत जरूरी बताया गया।
  • कुवैत की भूमिका: क्षेत्रीय तनाव के बावजूद कुवैत द्वारा संयम बरतने और विवाद को बढ़ने से रोकने के प्रयासों की सराहना की गई।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कुवैत और तुर्की ने व्यापार के लिए क्या लक्ष्य तय किया है

दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को 1 अरब डॉलर (2025 के अंत तक) से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

बैठक में किन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई

बैठक में सैन्य और रक्षा सहयोग, गाजा में शांति समझौता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही और अमेरिका-ईरान वार्ता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।