Kuwait News: कुवैत विदेश मंत्रालय ने इसराइल के खिलाफ उठाया सख्त कदम, अमरीकी शांति योजना ठुकराने पर जताई कड़ी आपत्ति

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक औपचारिक बयान जारी किया है जिसमें इसराइली अधिकारियों के उस फैसले की कड़ी निंदा की गई है जिसके तहत उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित शांति रोडमैप को खारिज कर दिया था। इस पूरी घटना के बाद से खाड़ी देशों में चिंता का माहौल है और आम जनता के बीच भी इस बात की चर्चा है कि किस तरह से क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ रही है। कुवैत सरकार का यह बयान कुवैत समाचार एजेंसी यानी KUNA के माध्यम से पूरी दुनिया के सामने आया है जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि इसराइल लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की अनदेखी कर रहा है।
अमरीकी शांति योजना और यूएनएससी प्रस्ताव
यह पूरा मामला उस शांति योजना से जुड़ा है जिसे अमरीका के नेतृत्व में तैयार किया गया था और इसे गाजा के लिए 20-सूत्रीय योजना भी कहा जाता है। इस योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2803 के तहत 17 नवंबर 2025 को अपनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य चल रहे संघर्ष को समाप्त करना, बंधकों की सुरक्षित वापसी कराना, गाजा पट्टी का विसैन्यीकरण करना और वहां एक अंतरराष्ट्रीय स्थायित्व बल के साथ-साथ शांति बोर्ड की स्थापना करना था। फलिस्तीनी समूहों ने इस योजना को स्वीकार कर लिया था लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने इसे मानने से साफ इंकार कर दिया।
आठ देशों का संयुक्त घोषणा पत्र
कुवैत का यह कड़ा रुख अकेले का नहीं है बल्कि यह 16 अगस्त 2026 को जारी किए गए उस संयुक्त घोषणा पत्र का हिस्सा है जिसे आठ अरब और इस्लामिक देशों के एक बड़े समूह ने मिलकर तैयार किया था। इस समूह में सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान जैसे देश भी शामिल हैं। इन सभी देशों ने मिलकर यह साफ कर दिया है कि इसराइल का इस तरह से शांति योजना को ठुकरा देना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बहुत बड़ा खतरा है। फलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने से लगातार मना करना और सैन्य कार्रवाई जारी रखने की जिद करना इस पूरे इलाके में तनाव को और ज्यादा बढ़ा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई है कि इसराइल का यह रवैया एक व्यापक शांति योजना को सीधे तौर पर नकारने जैसा है। इन देशों ने अमरीका से यह अपील की है कि वह इस मामले में अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखे ताकि इसराइल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तय किए गए मानकों का पालन करने के लिए बाध्य किया जा सके। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति काफी संवेदनशील है क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव हर तरह की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।