UN में कुवैत और GCC देशों का बड़ा बयान, समुद्री रास्तों पर खतरे को नकारा, रूस और चीन की वीटो के बाद नया ड्राफ्ट तैयार

संयुक्त राष्ट्र (UN) में कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि Ambassador Tariq Al-Banai ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने Bahrain, UAE, Saudi Arabia, Qatar और Jordan की तरफ से समुद्री रास्तों की सुरक्षा की बात की. उनका कहना है कि समुद्री रास्तों में कोई भी रुकावट दुनिया भर के तेल और सामान की सप्लाई को प्रभावित करेगी, जिससे पूरी दुनिया को परेशानी होगी.

समुद्री सुरक्षा को लेकर क्या हुआ?

GCC देशों और Jordan ने मिलकर एक प्रस्ताव तैयार किया था ताकि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे. इस मुद्दे पर मार्च में UN Security Council ने Resolution 2817 पास किया था, जिसमें ईरान की धमकियों की निंदा की गई थी. GCC देशों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री रास्तों को खुला रखना हर देश की जिम्मेदारी है.

रूस और चीन ने क्यों किया विरोध?

7 अप्रैल 2026 को UN Security Council में एक प्रस्ताव आया था, जिसे रूस और चीन ने वीटो (Veto) कर दिया. रूस का कहना था कि यह प्रस्ताव जल्दबाजी में लाया गया और इसमें युद्ध के पूरे संदर्भ को नजरअंदाज किया गया. अब रूस और चीन एक नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि युद्ध खत्म हो और शांति के लिए बातचीत शुरू हो सके.

तारीख मुख्य घटना
28 फरवरी 2026 US और Israel के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की
11 मार्च 2026 UN Security Council ने Resolution 2817 अपनाया और ईरान की धमकियों की निंदा की
2 अप्रैल 2026 GCC महासचिव Jasem Al Budaiwi ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा की मांग की
7 अप्रैल 2026 रूस और चीन ने समुद्री सुरक्षा के ड्राफ्ट प्रस्ताव को वीटो कर दिया
8 अप्रैल 2026 रूस ने अपना अलग प्रस्ताव लाने का ऐलान किया
11 अप्रैल 2026 कुवैत के राजदूत Salem Al-Shibli ने तटस्थता और स्थिरता की बात कही
16 अप्रैल 2026 Ambassador Tariq Al-Banai ने UNGA में GCC देशों की तरफ से संयुक्त बयान दिया