कुवैत सरकार अपने देश की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठा रही है। साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए ‘Cyber Shield’ प्रोजेक्ट को जल्द लागू किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य मकसद सरकारी डेटा और जरूरी डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित रखना है ताकि कोई बाहरी हमला इसे नुकसान न पहुँचा सके।

क्या है यह ‘Cyber Shield’ प्रोजेक्ट और यह कैसे काम करता है?

यह प्रोजेक्ट कुवैत सरकार और Google Cloud के बीच हुए एक समझौते का हिस्सा है। इसका मुख्य काम सरकारी विभागों के डिजिटल नेटवर्क को सुरक्षित करना है। इसमें एक सेंट्रल सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (SOC) बनाया गया है जो दिन-रात 24 घंटे काम करता है।

  • यह सिस्टम फिलहाल 65 सरकारी संस्थाओं को सुरक्षा कवच दे रहा है।
  • यह साइबर खतरों को पहले ही पहचान लेता है और तुरंत एक्शन लेता है।
  • इसमें अटैक सरफेस एनालिसिस और प्रोएक्टिव अलर्ट जैसे आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल होता है।
  • सरकारी विभागों को इस सिस्टम से जुड़ने के लिए कहा गया है और इसके लिए एक संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की सलाह दी गई है।

NCC ने डिजिटल सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए हैं?

इस प्रोजेक्ट की पूरी जिम्मेदारी अब National Cybersecurity Center (NCC) के पास है। 21 फरवरी 2026 को इसका मैनेजमेंट CAIT से ट्रांसफर कर NCC को सौंप दिया गया। NCC ने हाल ही में अपनी ताकत दिखाई जब 5 और 6 मार्च 2026 को उसने कई साइबर हमलों को नाकाम कर दिया और सरकारी सेवाओं को बिना रुके चालू रखा।

सरकार ने सुरक्षा के लिए कुछ कड़े नियम भी बनाए हैं। अब किसी भी बड़े साइबर हमले की जानकारी 24 घंटे के अंदर और अन्य रिपोर्ट करने योग्य ब्रीच की जानकारी 72 घंटे के अंदर देना जरूरी होगा। NCC अब सभी सरकारी सिस्टम के लिए रिस्क असेसमेंट और थ्रेट डिटेक्शन के मॉड्यूल तैयार कर रहा है।