कुवैत के साथ पांच अन्य खाड़ी सहयोगियों ने मिलकर क्षेत्र में हो रहे ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कतर और जॉर्डन ने एक साझा बयान जारी कर इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। यह आधिकारिक बयान 25 मार्च 2026 को कुवैत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है। इन देशों ने साफ किया है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयां क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।

📰: कुवैत ने ईरान की आक्रामकता पर जताया कड़ा विरोध, कहा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी अब स्वीकार्य नहीं

इन हमलों के बाद क्या बड़े फैसले लिए गए?

सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर खाड़ी देशों ने कई कड़े कदम उठाए हैं जो इस प्रकार हैं:

  • कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत Mohammad Toutounji को तीसरी बार तलब किया और हमलों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
  • 25 मार्च 2026 को कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक पर एक ड्रोन हमला हुआ था, जिसके बाद तनाव काफी बढ़ गया है।
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में खाड़ी देशों और जॉर्डन ने एक प्रस्ताव पेश किया जिसे मंजूरी मिल गई है।
  • इस प्रस्ताव में ईरान से हमलों को तुरंत रोकने और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की गई है।
  • देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का हवाला देते हुए ईरान से अपनी आक्रामकता खत्म करने को कहा है।

खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा असर?

खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य विदेशी प्रवासी रहते हैं, जिनके लिए ये सुरक्षा अपडेट काफी महत्वपूर्ण हैं। हमलों के केंद्र में एयरपोर्ट और तेल क्षेत्र जैसी नागरिक सुविधाएं होने की वजह से वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। कुवैत और अन्य मित्र देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे क्षेत्र की शांति बनाए रखने के लिए दखल दें। कतर और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी ऊर्जा केंद्रों पर हो रहे इन हमलों को एक खतरनाक संकेत माना है। फिलहाल सभी देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया है ताकि नागरिक सुविधाओं को किसी भी नुकसान से बचाया जा सके।