कुवैत ने कई दशकों बाद पहली बार कोर्ट (न्यायालय) की फीस बढ़ाई है, ताकि बिना मतलब और बदनीयती वाले केसों की संख्या कम हो सके जो कोर्ट का समय बर्बाद करते हैं. बीते हफ्ते कैबिनेट की ओर से यह फैसला मंज़ूर किया और 1973 के कानून नंबर 17 में बदलाव करके न्यायिक प्रणाली तक पहुंचने की लागत बढ़ा दी गई है.

कुवैत ने बढ़ाई कोर्ट फीस 

  1. नई कोर्ट फीस लागू
    कुवैत सरकार ने एक पुराने कानून में बदलाव करके कोर्ट फीस बढ़ा दी है. इसका मकसद यह है कि लोग बिना वजह के कोर्ट में केस न करें.

  2. क्यों ज़रूरी था यह बदलाव
    कोर्ट में बहुत सारे ऐसे केस आ रहे थे जो छोटे-मोटे मामलों के थे या जिनमें कोई खास वजह नहीं थी. इससे ज़रूरी मामलों में देरी हो रही थी.

  3. क्या बदला है?

  • केस दर्ज कराने की फीस और अपील करने के लिए ज़मानत की रकम अब पहले से ज्यादा है.
  • अब जनरल कोर्ट में अपील करने के लिए केस की रकम 10,000 कुवैती दिनार से ज़्यादा होनी चाहिए (पहले 5,000 थी).
  • कोर्ट ऑफ कसेशन में अपील करने के लिए केस की रकम 30,000 दिनार से ज़्यादा होनी चाहिए और 500 दिनार की ज़मानत भी देनी होगी.

शिक्षा प्रणाली की सुरक्षा के लिए संशोधनों को मंजूरी

अध्यक्षता शेख अहमद अल अब्दुल्ला की साप्ताहिक अध्यक्षता बैठक में सरकार ने शिक्षा प्रणाली की सुरक्षा के लिए और भी कानूनी संशोधनों को मंज़ूरी दी. खासकर ये मंजूरी माध्यमिक (intermediate) और उच्च माध्यमिक (secondary) स्कूल की परीक्षाओं के दौरान पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए दी गई.

दंड संहिता (Penal Code) में किए गए संशोधनों के तहत दो नए अनुच्छेद — 259 बिस और 259 बिस ए जोड़े गए हैं, जिनमें नकल और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के लिए सख्त सज़ाएं तय की गई हैं.

अब अगर कोई परीक्षा के पेपर लीक करता है, बेचता है या बांटता है, तो उसे पाँच साल तक की जेल और 1,000 से 5,000 कुवैती दिनार तक जुर्माना हो सकता है.
अगर कोई व्यक्ति बिना इजाज़त छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं या अंकों में छेड़छाड़ करता है, तो उसे सात साल तक की जेल और 5,000 से 10,000 दिनार तक जुर्माना हो सकता है.

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद कुवैत की शैक्षणिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना और छात्रों के बीच ईमानदार प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है. ये बदलाव खासतौर पर इसलिए किए गए हैं क्योंकि कुछ सालों में राष्ट्रीय परीक्षाओं के दौरान नकल और धांधली की घटनाएं बढ़ी हैं.

कैबिनेट ने राष्ट्रीय विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और यह वादा किया कि वह महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (infrastructure projects) को तेज़ी से आगे बढ़ाएगी और ऐसे नियमों व अड़चनों को हटाएगी जो इन परियोजनाओं में देरी का कारण बन सकते हैं.