कुवैत की इंटरनेशनल इस्लामिक चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशन (IICO) ने गाज़ा पट्टी के उन लोगों के लिए एक बड़ी पहल की है जिनके हाथ या पैर युद्ध में कट गए हैं। ‘Restoring Hope’ नाम के इस प्रोजेक्ट के ज़रिए अब उन्हें नकली अंग (prosthetic limbs) लगाए जाएंगे। इस नेक काम में जॉर्डन चैरिटी ऑर्गनाइजेशन साथ मिलकर काम कर रहा है।

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‘Restoring Hope’ प्रोजेक्ट के तहत क्या मदद मिलेगी?

कुवैत की IICO संस्था ने गाज़ा के घायलों के लिए यह खास प्रोजेक्ट लागू किया है। इसका मुख्य मकसद उन लोगों की मदद करना है जिन्होंने अपने अंग खो दिए हैं और अब उन्हें दोबारा चलने-फिरने या काम करने में मदद चाहिए। Kuwait News Agency (KUNA) ने 3 मई 2026 को आधिकारिक तौर पर इस बात की जानकारी दी। इस पहल से उन हज़ारों लोगों को फायदा होगा जो गंभीर चोटों के कारण लाचार हो गए थे।

कुवैत और जॉर्डन की यह साझेदारी कैसे काम करेगी?

यह पूरा प्रोजेक्ट जॉर्डन चैरिटी ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। इस मिशन की कुछ खास बातें नीचे दी गई हैं:

  • मोबाइल यूनिट्स: उन लोगों के लिए जो अस्पताल नहीं जा सकते, मोबाइल सपोर्ट यूनिट्स (MASUs) का इस्तेमाल किया गया है।
  • विशेषज्ञ टीमें: जॉर्डन की रॉयल मेडिकल सर्विसेज की टीमें इन यूनिट्स के ज़रिए लोगों तक पहुँच रही हैं।
  • तकनीकी मदद: इस प्रोजेक्ट में यूके की कंपनियों Koalaa और Amparo की मदद ली गई है ताकि आधुनिक और बेहतर नकली अंग लगाए जा सकें।
  • डिजिटल रिकॉर्ड: हर अंग का डिजिटल रजिस्ट्रेशन किया गया है ताकि भविष्य में रिमोट तरीके से उनकी सेहत और अंग की स्थिति पर नज़र रखी जा सके।

इस पहल का विज़न जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II द्वारा तैयार किया गया था, जिसे अब कुवैत की संस्थाएं आगे बढ़ा रही हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कुवैत की कौन सी संस्था गाज़ा में नकली अंग लगा रही है?

कुवैत की इंटरनेशनल इस्लामिक चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशन (IICO) जॉर्डन चैरिटी ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर ‘Restoring Hope’ प्रोजेक्ट के तहत गाज़ा में यह काम कर रही है।

इस प्रोजेक्ट में कौन सी तकनीक और पार्टनर्स शामिल हैं?

इसमें यूके की कंपनियों Koalaa और Amparo की तकनीकी मदद ली गई है और मोबाइल सपोर्ट यूनिट्स के ज़रिए घायलों तक पहुँच बनाई जा रही है।