कुवैत के प्रधानमंत्री ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी ज़मीन के सही इस्तेमाल को लेकर एक अहम मीटिंग की। इस बैठक का मुख्य मकसद सरकारी ज़मीन का हिसाब रखना और उसे सही तरीके से बांटने के लिए एक योजना तैयार करना है। सरकार चाहती है कि देश के विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके ताकि आम लोगों को इसका फायदा मिले।

प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की सरकारों की सफलता इस बात से मापी जाएगी कि नागरिकों को ज़मीन पर क्या नतीजे मिले। सरकार का लक्ष्य कुवैत को एक बड़े क्षेत्रीय हब के रूप में तैयार करना है, जिसके लिए ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।

ज़मीन प्रबंधन और नए शहर

सरकार अब सरकारी ज़मीनों की एक पूरी लिस्ट तैयार कर रही है ताकि उनका सही वर्गीकरण किया जा सके। इससे ज़मीनों की कालाबाजारी रुकेगी और खाली पड़ी ज़मीन को आर्थिक विकास के काम में लाया जा सकेगा। इसके साथ ही साउथ साद अल अब्दुल्ला जैसे नए शहरी इलाके बसाए जा रहे हैं, जिनमें स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी और पर्यावरण का ख्याल रखा जाएगा।

बड़े प्रोजेक्ट्स और निवेश

कुवैत अपने बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए भारी निवेश कर रहा है। सड़कों के रखरखाव और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए पब्लिक वर्क्स मिनिस्ट्री लगातार काम कर रही है। इसमें कुवैत मेट्रो और गल्फ रेलवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं जो कुवैत को अन्य GCC देशों से जोड़ेंगे।

प्रोजेक्ट का नाम खास जानकारी
कुल विकास बजट (2020-25) 124 बिलियन डॉलर
नया एयरपोर्ट टर्मिनल 4 बिलियन डॉलर का खर्च
वार्षिक विकास योजना (25/26) 6 बिलियन डॉलर का आवंटन
गल्फ रेलवे प्रोजेक्ट 111 किलोमीटर लंबी लाइन (नुवैसेब से शददियह)
बंदरगाह विकास मुबारक अल-कबीर पोर्ट का विकास

इन सबके अलावा बिजली और पानी की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए नए पावर प्लांट और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं। सरकार अब इन प्रोजेक्ट्स के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल का इस्तेमाल कर रही है, जिससे काम तेजी से पूरा हो सके और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.