कुवैत में सुरक्षा हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब 31 जुलाई 2026 को ईरान की ओर से आए कई ड्रोन ने देश की सीमा में घुसने की कोशिश की। कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने पुष्टि की कि सेना ने इन दुश्मन ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराया। इस हमले को कुवैत ने अपनी संप्रभुता का उल्लंघन और एक खतरनाक कदम बताया है। हमले के दौरान गिरे मलबे से कुछ जगहों पर मामूली नुकसान जरूर हुआ, लेकिन गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई।
हमले के पीछे की वजह और ईरानी दावा
ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उनका दावा है कि उन्होंने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों, खास तौर पर Ahmed Al Jaber Air Base को निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई Qeshm Island पर अमेरिकी सैन्य हमले का बदला लेने के लिए की गई, जिसमें उनके परिवार के तीन लोग मारे गए थे। ईरान ने इसके पहले 30 जुलाई को कुवैत के Ali Al Salem Air Base के साथ-साथ जॉर्डन और बहरीन में भी ड्रोन हमले करने का दावा किया था।
क्षेत्रीय देशों की चिंता और सुरक्षा व्यवस्था
इस तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सऊदी अरब ने कुवैत और जॉर्डन के साथ एकजुटता दिखाई है। सऊदी सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इलाके में शांति बहाल करने की मांग की है। सऊदी अरब ने उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी के कार्यालय पर हुए हमले में मारे गए एक वर्कर के प्रति भी संवेदना व्यक्त की है। इसके अलावा, समुद्री सुरक्षा के लिए 14 देशों का एक नया गठबंधन बनाने की भी घोषणा की गई है। इस बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कुवैत में अपनी सैन्य मौजूदगी को कम करने का फैसला किया है, हालांकि कुवैत अब भी अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक सहयोगी बना हुआ है।
