कुवैत में सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है क्योंकि 21 जुलाई 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत के Ali al-Salem base पर बड़ा हमला किया है। इस हमले में ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे बेस पर मौजूद ड्रोन हैंगर, रडार साइट, और संचार केंद्र पूरी तरह तबाह हो गए हैं। कुवैत न्यूज एजेंसी (KUNA) के अनुसार, इस घटना ने पूरे गल्फ क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
🚨: Oman और EU के बीच हुआ बड़ा समझौता, मस्कट में खुलेगा नया राजनयिक मिशन।
सुरक्षा को लेकर गल्फ देशों की बैठक
इस बड़े हमले के बाद, कुवैत की सेना के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ Lieutenant General Khaled Al-Shuraiaan ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है। GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और ‘युद्ध अपराध’ करार दिया है।
भारत और अन्य देशों के साथ रक्षा साझेदारी
अपने बचाव के लिए कुवैत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रक्षा साझेदारी बढ़ा रहा है। इससे पहले 15 जुलाई 2026 को कुवैत ने चीन के राजदूत के साथ सुरक्षा पर बात की थी और पाकिस्तान के साथ भी रक्षा व्यवस्था को लेकर बातचीत चल रही है। गल्फ देशों ने 1 जुलाई 2026 को ही अपनी सैन्य एकता और सुरक्षा को मजबूत करने का संकल्प लिया था क्योंकि गल्फ देशों का मानना है कि उनकी सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई है।
