कुवैत और ईरान के बीच तनाव अचानक बहुत बढ़ गया है। 27 मई 2026 की रात को ईरान की तरफ से कुवैत को निशाना बनाकर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई, जिसे कुवैत की एयर डिफेंस सेना ने सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने इस घटना की पुष्टि की है और इसे दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर समझौते का गंभीर उल्लंघन बताया है। इस घटना के बाद से खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
कुवैत और अमेरिकी सेना ने हमले को लेकर क्या जानकारी दी?
कुवैत की सेना ने बयान जारी कर बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने देश की सीमा में आ रहे बाहरी खतरे को समय रहते हवा में ही ढेर कर दिया। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। वहीं, अमेरिकी सेना CENTCOM ने बताया कि इस मिसाइल हमले से ठीक कुछ घंटे पहले ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 5 ड्रोन भी लॉन्च किए थे, जिन्हें अमेरिकी बलों ने हवा में नष्ट कर दिया था।
ईरान और अन्य देशों ने इस कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे एक जवाबी कार्रवाई बताया है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी सेना ने पहले उनके बंदर अब्बास हवाई अड्डे के पास सीजफायर का उल्लंघन किया था, जिसके जवाब में उन्होंने यह कार्रवाई की है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के विदेश मंत्रालय ने भी इस हमले का विरोध करते हुए कहा है कि यह कुवैत की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मामले पर बोलते हुए कहा कि ईरान अब कमजोर स्थिति में बातचीत कर रहा है और होर्मुज अंतरराष्ट्रीय पानी है, जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं चलेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कुवैत पर ईरान का मिसाइल हमला कब हुआ था?
यह मिसाइल हमला 27 मई 2026 को रात करीब 10:17 बजे हुआ था, जिसे कुवैत के डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया।
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कब लागू हुआ था?
पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच एक नाजुक सीजफायर समझौता कराया गया था, जो 8 अप्रैल 2026 से लागू हुआ था।