कुवैत में अली अल सलेम एयर बेस पर ईरान की तरफ से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को कुवैती एयर डिफेंस ने हवा में ही मार गिराया है। यह घटना 28 मई 2026 की है, जिसका मलबा एयर बेस के रनवे पर गिरा। इस मलबे की चपेट में आने से वहां मौजूद अमेरिकी सेना के पांच जवान मामूली रूप से घायल हो गए हैं। इसके अलावा अमेरिका का एक कीमती MQ-9 Reaper ड्रोन पूरी तरह नष्ट हो गया है और एक अन्य ड्रोन को भारी नुकसान पहुंचा है।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और हमले की वजह

ईरानी सेना IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। ईरान का कहना है कि यह हमला बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमलों का सीधा जवाब था। IRGC ने इसे एक गंभीर चेतावनी बताया है। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले को युद्धविराम का बड़ा उल्लंघन बताया है। यह हमला तब हुआ जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम को बढ़ाने के लिए बातचीत चल रही थी।

कुवैत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया और नुकसान का ब्योरा

इस हमले के बाद कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरान की कड़ी आलोचना की है। कुवैत ने इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा का सीधा उल्लंघन बताया है और इसके लिए पूरी तरह से ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। कुवैत ने मांग की है कि तेहरान तुरंत अपने इन आक्रामक हमलों को रोके। इस हमले में अमेरिका का लगभग 30 मिलियन डॉलर की कीमत वाला एक ड्रोन पूरी तरह तबाह हो गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कुवैत में हुए इस हमले में अमेरिका को कितना नुकसान हुआ है?

इस मिसाइल हमले के मलबे से अमेरिका का 30 मिलियन डॉलर की कीमत वाला एक MQ-9 Reaper ड्रोन नष्ट हो गया और एक दूसरा ड्रोन क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके साथ ही पांच अमेरिकी कर्मियों को मामूली चोटें आई हैं।

ईरान ने कुवैत में एयर बेस पर मिसाइल क्यों दागी?

ईरानी सेना IRGC के अनुसार, यह हमला बंदर अब्बास हवाई अड्डे के पास अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में किया गया था।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.