Kuwait में क्षेत्रीय तनाव के बीच सुरक्षा हालात बिगड़ गए हैं। 17 जुलाई 2026 से शुरू हुए हमलों में ईरान ने Kuwait के महत्वपूर्ण नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण तेल उद्योग की एक अहम जगह और बिजली व पानी के संयंत्र प्रभावित हुए हैं, जिससे देश की सुरक्षा पर बड़ा संकट पैदा हो गया है।
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हमलों का असर और सरकारी प्रतिक्रिया
18 जुलाई को Kuwait की सेना ने ईरान की ओर से आए मिसाइलों और ड्रोन को हवा में रोकने की कोशिश की, जिससे कई जगह धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। इस हमले में Kuwait Petroleum Corporation (KPC) के एक महत्वपूर्ण तेल संयंत्र में कुछ लोगों के घायल होने की खबर है। साथ ही, कुछ सैन्यकर्मी भी घायल हुए हैं। हमलों के खतरे को देखते हुए Kuwait International Airport पर उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, जिसका असर उन भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ा जो यात्रा कर रहे थे।
Kuwait के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। Kuwait का बिजली और जल मंत्रालय लोगों से पानी और बिजली की खपत कम करने की अपील कर रहा है, क्योंकि एक मुख्य डिसेलिनेशन प्लांट पर हुए हमले से देश की 90% पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है।
ईरान का दावा और बढ़ता तनाव
ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। उनका दावा है कि उन्होंने Camp Arifjan, Ali Al Salem Air Base और Al Ahmadi Port पर स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया है। इस बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर के एक सलाहकार मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी, तो ईरान पूर्ण पैमाने पर बड़े हमले करेगा। फिलहाल, Kuwait में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क हैं।
