12 जुलाई 2026 को कुवैत पर हुए ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को ईरान की ओर से गंभीर उकसावा और देश की संप्रभुता पर सीधा खतरा बताया है। कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि उन्होंने अपने हवाई क्षेत्र में घुसने वाले कई दुश्मन ड्रोन और मिसाइलों को रोकने का काम किया है।
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हमलों का मुख्य कारण और निशाना
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। ईरान ने कुवैत के अलावा बहरीन, कतर और UAE को भी निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका की ओर से उनके ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में किया गया है, जहां अमेरिका ने ईरान के 300 से ज्यादा ठिकानों पर स्ट्राइक की थी। ईरान ने दावा किया कि उन्होंने कुवैत में अमेरिकी सेना के रडार साइट, गोला-बारूद डिपो और पेट्रियट सिस्टम को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
कुवैत सरकार ने इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2817 का उल्लंघन माना है। कुवैत ने साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता उनके लिए रेड लाइन है। इस घटना के बाद सऊदी अरब समेत अन्य खाड़ी देशों ने भी ईरान की इन हरकतों की निंदा की है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल, वहां रह रहे प्रवासियों के बीच भी इस स्थिति को लेकर चिंता का माहौल है क्योंकि क्षेत्र में अचानक से तनाव काफी बढ़ गया है।
