Kuwait में 14 जुलाई 2026 को ईरान की ओर से बड़ा हमला किया गया, जिसे कुवैती सरकार ने गंभीर आक्रामकता करार दिया है। इस हमले के दौरान ईरान ने कई मिसाइल और ड्रोन दागे, जिसके चलते कुवैत के कई इलाकों में मलबे गिरे और संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि उनके सुरक्षा बलों ने देश के आसमान में दुश्मन के हवाई ठिकानों को रोकने का प्रयास किया।

ईरान का दावा और अमेरिका का रुख

ईरान के IRGC ने यह माना कि उन्होंने Kuwait, Bahrain और Jordan में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई दक्षिणी ईरान पर हुए अमेरिकी हमलों का जवाब थी। इन हमलों से कुवैत के संचार तंत्र, ईंधन डिपो, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम पर असर पड़ा है। वहीं, अमेरिका के CENTCOM ने बताया कि उन्होंने ईरान के सैन्य ठिकानों पर अपनी कार्रवाई पूरी कर ली है ताकि ईरान की समुद्री व्यापार को बाधित करने वाली क्षमताओं को कम किया जा सके।

क्षेत्रीय देशों ने की निंदा

इस घटना के बाद सऊदी अरब और कतर समेत कई खाड़ी देशों ने कड़ी आपत्ति जताई है। सऊदी अरब ने कुवैत के सीमावर्ती केंद्रों और कुवैत ऑयल कंपनी के तेल रिग पर हुए हमलों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। कतर ने इसे संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन कहा है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का उल्लंघन माना है। इलाके में बढ़ते तनाव के कारण प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल है, हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार लगातार कदम उठा रही है।

Sushma Kumari

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