कुवैत सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए लेबनान के 8 बड़े अस्पतालों को अपनी ‘नेशनल सेंक्शन लिस्ट’ यानी आतंकी सूची में डाल दिया है। यह फैसला 8 फरवरी 2026 को लिया गया और अगले दिन वहां के सरकारी अखबार में छपा। इस खबर के आते ही लेबनान की सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई है और कहा है कि उन्हें इसके बारे में पहले से कुछ नहीं बताया गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह दोनों देशों के रिश्तों के लिए ठीक नहीं है।

किन 8 अस्पतालों पर लगी है रोक?

कुवैत ने जिन अस्पतालों को बैन किया है, वे मुख्य रूप से दक्षिण लेबनान और बेरुत के इलाकों में हैं। कुवैती प्रशासन का आरोप है कि ये अस्पताल हिजबुल्लाह से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं। नीचे उन अस्पतालों की लिस्ट दी गई है जिन पर पाबंदी लगाई गई है:

अस्पताल का नाम इलाका / शहर
अल-रसूल अल-आजम अस्पताल एयरपोर्ट रोड, बेरूत
सेंट जॉर्ज अस्पताल हदाथ
शेख रागेब हर्ब अस्पताल नबातिह
सलाह गंदूर अस्पताल बिंत जबील
अल-अमल अस्पताल बाल्बेक
दार अल-हिकमा अस्पताल बाल्बेक
अल-बतूल अस्पताल हरमेल
अल-शिफा अस्पताल खलदेह

क्या है यह नया नियम और क्यों लिया गया फैसला?

कुवैत ने यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र (UN) के कड़े नियमों के तहत की है। कुवैत के कानून के मुताबिक, जैसे ही कोई संस्था इस लिस्ट में आती है, उसके सारे फंड और बैंक खाते तुरंत फ्रीज कर दिए जाते हैं। इसके लिए पहले से नोटिस देने की जरूरत नहीं होती है।

नियमों के अनुसार, कुवैत के अंदर कोई भी व्यक्ति या कंपनी इन अस्पतालों को न तो पैसा भेज सकती है और न ही कोई मदद दे सकती है। अगर कोई बैंक या वित्तीय संस्था इन अस्पतालों से जुड़ी कोई संपत्ति रखती है, तो उसे 24 घंटे के भीतर सरकार को बताना होगा। कुवैत का कहना है कि यह कदम आतंकवाद को रोकने के लिए जरूरी था।

आम लोगों और मरीजों पर क्या होगा असर?

इस फैसले का सीधा असर इलाज और पैसों के लेन-देन पर पड़ सकता है। चूंकि इन अस्पतालों के खाते फ्रीज हो जाएंगे, तो कुवैत से इलाज के लिए पैसा भेजना मुश्किल हो जाएगा। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि ये अस्पताल आम नागरिकों के इलाज के लिए हैं और सरकार के पास रजिस्टर हैं।

प्रवासी लेबनानी जो अपने रिश्तेदारों के इलाज के लिए कुवैत से मदद भेजते थे, उनके सामने अब अनिश्चितता आ गई है। साथ ही, मेडिकल वीज़ा को लेकर भी दिक्कतें आ सकती हैं। लेबनान सरकार अब इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कुवैत के अधिकारियों से बात करने की कोशिश कर रही है ताकि आम मरीजों को परेशानी न हो।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.