कुवैत इस वक्त काफी तनाव में है। ईरान की तरफ से हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद कुवैत सरकार ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। कैबिनेट ने साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा और सेना पूरी तरह तैयार है।

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कुवैत के विदेश मंत्रालय ने 28 जून 2026 को ईरान की हरकतों को बेहद गलत बताया। मंत्रालय ने कहा कि यह कुवैत की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन है। 30 जून को हुई कैबिनेट की बैठक में भी इन हमलों की कड़ी निंदा की गई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के तौर पर कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

सेना की तैयारी और सुरक्षा इंतजाम

सरकार ने देश की सशस्त्र सेनाओं को पीक ऑपरेशनल रेडिनेस यानी उच्चतम स्तर की तैयारी पर रहने का आदेश दिया है। कुवैत की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। सुरक्षा के लिए M1A2 अब्राम्स टैंक, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और यूरोफाइटर टाइफून जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 11 जून और 28 जून को भी दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया गया था।

कंसल्टेंसी कॉन्ट्रैक्ट्स पर नई सख्ती

सैन्य तैयारी के साथ-साथ कैबिनेट ने सरकारी खर्चों और समझौतों पर भी लगाम कसी है। सरकार ने आदेश दिया है कि अब कोई भी कंसल्टेंसी कॉन्ट्रैक्ट बिना कैबिनेट की मंजूरी के पास नहीं होगा। क्षेत्रीय तनाव के माहौल में सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि सभी सरकारी खर्चों पर पूरी निगरानी रखी जा सके।

क्षेत्रीय तनाव का असर

यह पूरा विवाद अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खींचतान का हिस्सा है। कुवैत और बहरीन में अमेरिकी मिलिट्री बेस होने की वजह से इन देशों पर हमलों का खतरा बढ़ गया है। यह तनाव खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते पर नियंत्रण को लेकर है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर उनके बिना कोई शिपिंग व्यवस्था की गई तो तनाव और बढ़ेगा।